स्कूल से लौट कर शाम को दोस्तों के साथ कॉलोनी में साइकिल चला रहे एक बालक की गिरने से मौत हो गई। बताते हैं कि साइकिल का हैंडल उसके पेट में जा घुसा और लिवर फट जाने से उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। इकलौते बेटे कृष्णा (वत्सल) रावत की मौत के बाद माता-पिता ने परोपकारी निर्णय लेते हुए बच्चे की आंखें दान कर दी।
अन्नपूर्णा टीआई सुनील शेजवार ने बताया कि सुदामा नगर निवासी कृष्णा उर्फ वत्सल (11) पिता आशीष रावत बुधवार शाम दोस्तों के साथ साइकिल चला रहा था। दोस्तों ने परिजन को बताया कि साइकिल से संतुलन बिगड़ने के कारण वह गिरा तो हैंडल उसके पेट में घुस गया। गिरते ही वह बेहोश हुआ और फिर नहीं उठा। मामा अनुज रावत ने बताया कि वत्सल घर का इकलौता बेटा था। वह सेंट नार्बट स्कूल में कक्षा 7वीं में पढ़ रहा था। वह होनहार और चंचल था।
पिता निजी कंपनी में जॉब करते हैं। उसके दोस्तों ने जब परिजन को बताया तो वे वत्सल को लेकर चोइथराम हॉस्पिटल पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बालक की मौत से बेसुध माता-पिता ने बड़ा साहस दिखाया और उसकी आंखें दान की। पोस्टमार्टम में पता चला कि साइकिल का हैंडल तेजी से पेट में लगने के कारण उसका लिवर फट गया था। इस कारण उसकी मौत हो गई। अन्नपूर्णा पुलिस मर्ग कायम कर जांच कर रही है।

एक दिन में चार नेत्रदान और एक देहदान
कम उम्र के बच्चों की अचानक हुई मृत्यु से जिन परिवारों पर दुख का पहाड़ टूटा था, उन्होंने ऐसे विकट समय में भी परोपकार की मिसाल कायम की। गुरुवार को शहर में चार नेत्रदान हुए। इनमें से तीन कम उम्र के बच्चे और युवतियां हैं। पहला देह व नेत्रदान रमणलाल जैन खजांची के परिजन ने उनकी मृत्यु उपरांत किया। खजांची परिवार में यह चौथा देहदान है। कशिश वाधवानी एक होस्टल में हादसे का शिकार हुई। उनके परिजन ने भी नेत्र दान किए। वहीं सुरभि गुप्ता की स्मृति को बनाए रखने के लिए परिजन ने उसके नेत्र दान किए।




