Friday, February 13, 2026
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‘बीजेपी सुप्रीम कोर्ट से बंद करा देगी लाडली बहना योजना’

विधानसभा का बजट सत्र शुरू हो रहा है। सत्र के पहले ही दिन भोपाल में विभिन्न समस्याओं और वादाखिलाफी के विरोध में किसान कांग्रेस विधानसभा का घेराव करेगी। इस घेराव की जानकारी देने के लिए बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि “लाड़ली बहना”, “किसान सम्मान निधि” जैसी फ्री-बीज़ योजनाओं को बीजेपी खुद सुप्रीम कोर्ट जाकर बंद करवा देगी। बिहार विधानसभा चुनाव के एक महीने बाद ही ये योजनाएं बंद हो सकती हैं।

पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा- बिहार के चुनाव सामने हैं। इसलिए ये फ्री-बीज की एक नई पॉलिसी लेकर आ रहे हैं। चूंकि, बीजेपी को बिहार का चुनाव जीतना है। वैसे कई राज्यों में वह जीत चुकी है। चूंकि, लाड़ली बहना और महाराष्ट्र सहित तमाम ऐसी स्कीम एक्सपोज हो गई हैं। इसलिए फ्री-बीज की एक नई पॉलिसी ला रहे हैं

सज्जन बोले- सिर्फ भाषणों से नहीं होगा किसानों का सशक्तिकरण

सज्जन सिंह वर्मा ने कहा- किसान कांग्रेस के नेतृत्व में कल विधानसभा का घेराव किया जाएगा। मैं देखता हूं कि जब भी किसान का मामला आता है तो हम शहर वाले लोगों को लगता है कि कहां बात हो रही है? जबकि इस देश में 60 प्रतिशत आबादी किसान की है। हम पल बढ़ रहे हैं तो उसके पीछे किसान हैं। सिर्फ मोदी जी और मोहन यादव के भाषण देने से किसान का सशक्तिकरण और किसान मजबूत नहीं हो सकता। हमारी बहुत लंबे समय से मांग है कि गेहूं का भाव 3 हजार रुपए प्रति क्विंटल किया जाए। बीजेपी ने 26 सौ रुपए में गेहूं खरीदी कराने की घोषणा की है।

व्यापारी 3 हजार में गेहूं खरीद रहे तो सरकार क्यों नहीं खरीदती?

सज्जन वर्मा ने कहा- अखबार उठाकर देख लीजिए कल इंदौर की मंडी में 3 हजार से 3100 रुपए क्विंटल गेहूं व्यापारी ने खरीदा है तो सरकार 2600 रुपए पर खरीदकर किसान को क्या ठगना चाहती है। किसान की 3 हजार की मांग वाजिब है। किसान ज्यादा पैसे के लालच में व्यापारी को बेचता है। कई बार कुछ फर्जी व्यापारी किसानों का करोड़ों रुपए गेहूं खरीदकर गायब हो जाते हैं। इसलिए हम दबाव डालते हैं कि सरकार 3 हजार रुपए गेहूं का मूल्य करें। ये पूरी कांग्रेस पार्टी चाहती है।

कल से मप्र विधानसभा का बजट सत्र है। भोपाल में बड़ी इन्वेस्टर्स मीट हुई। अब तक के इतिहास का सबसे बड़ा मीट 4 लाख 20 हजार करोड़ के एमओयू साइन हुए।

शिवराज चौहान के कार्यकाल में 7-8 मीट हुई। उनके सारे मीट जोड़ लो तो करीब साढे़ 13 लाख करोड़ के एमओयू हुए थे। उनमें से 5 फीसदी भी धरातल पर नहीं उतरे। हम इन्वेस्टर्स मीट के आलोचक नहीं हैं। प्रदेश को आगे बढ़ाने के लिए ये जरूरी है। लेकिन, वाहवाही लूटने के लिए लंबे-चौड़े आंकडे़ प्रस्तुत कर देना ये मप्र के हित में नहीं हैं।

बाबा रामदेव को 5 साल पहले 50 एकड़ जमीन मिली, ₹1 खर्च नहीं किया सज्जन वर्मा ने कहा- 5 साल पहले जब इन्वेस्टर्स मीट हुई थी। तब पतंजलि के फूं-फां करने वाले बाबा रामदेव को 50 एकड़ जमीन दी गई थी। उन्होंने कहा था हम 500 करोड़ रुपए खर्च करेंगे। पीथमपुर में आप देखिए एक कौड़ी खर्च नहीं की। इतना बड़ा उदाहरण होने के बाद भी इस इन्वेस्टर्स समिट के आरंभ में ही अधिकारी दौड़ते हुए जाते हैं और बाबा रामदेव के साथी बालकृष्ण को 432 एकड़ जमीन देने का लेटर देकर आ गए।

इतना तो अंधा भी समझता है कि 50 एकड़ जमीन देने पर कुछ नहीं किया। अब 432 एकड़ जमीन इसलिए दी ताकि आंकडे बढ़े हुए दिखे। हमारा ये मुद्दा रहेगा कि पिछली सात-आठ इन्वेस्टर्स मीट में जो एमओयू हुए उनमें से कितने लोगों ने आगे एग्रीमेंट किया? दिग्विजय सिंह जब मुख्यमंत्री थे। तब मैं मंत्री हुआ करता था। बजट सत्र 75 दिन चलता था। अभी तो मैं समझता हूं कि 5-6 दिन में ही खत्म कर देंगे।

किसान कांग्रेस के अध्यक्ष बोले- मोदी गारंटी एक भी पूरी नहीं हुई किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष धर्मेन्द्र सिंह चौहान ने कहा 2023 के चुनाव के पहले जो मोदी गारंटी दी गई थी। उन मोदी गारंटियों के खिलाफ किसान कांग्रेस के साथ पूरी पार्टी विधानसभा का घेराव करेगी। बीजेपी ने किसानों के लिए वादे किए थे कि 2700 रुपए क्विंटल में गेहूं, 3100 रुपए क्विंटल में धान खरीदेंगे। लाडली बहना को 3 हजार रुपए देंगे। 450 रुपए में गैस का सिलेंडर देंगे। बीजेपी ने किसानों के साथ छलावा किया। एक भी मोदी गारंटी पूरी नहीं की। अभी तो हम विधानसभा घेराव कर रहे हैं। जरूरत पड़ी तो मुख्यमंत्री निवास घेरेंगे। मंत्रियों का घेराव करेंगे और उनके घर के सामने धरना देंगे।

किसान कांग्रेस की मुख्य मांगें

  • भूमि अधिग्रहण में किसानों की जमीन छीन रहे हैं। हमारी मांग है- चार गुना मुआवजा मिलना चाहिए।
  • किसानों की फसलें खराब होती हैं तो ओले पटवारी हल्का देखकर नहीं गिरते। हमारी मांग है- खेत को इकाई मानकर मुआवजा दिया जाए।
  • लाखों टन धान पड़ी हुई है। 2200 रुपए में धान खरीदी जा रही है। कोई खरीदने को तैयार नहीं हैं।
  • टमाटर एक रुपए किलो में नहीं बिक रहा है। किसान खेत में नष्ट कर रहा है।
  • जिन किसानों की टमाटर, लहसुन, गोभी की फसल खराब हो गई है। उन किसानों को मुआवजे की राशि 50 हजार रुपए एकड़ के हिसाब से दी जाए।

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