मध्यप्रदेश के चर्चित नर्सिंग घोटाले को लेकर भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) ने अधिकारियों पर दोषियों को बचाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने शुक्रवार को मुख्य सचिव को एक विस्तृत ज्ञापन भी सौंपा। शनिवार को रवि परमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ज्ञापन के साथ घोटाले से जुड़े जरूरी दस्तावेज भी संलग्न किए गए हैं। एनएसयूआई की मांग है कि घोटाले की स्वतंत्र और उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि जब तक दोषियों को सजा नहीं मिलेगी, एनएसयूआई शांत नहीं बैठेगी।
रवि परमार बोले- एक साल बाद भी दोषी घूम रहे
रवि परमार ने कहा कि घोटाला एक साल पहले सामने आया था। इतने समय बीत जाने के बावजूद अब तक दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। पूर्व चिकित्सा शिक्षा आयुक्त द्वारा 110 से अधिक डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे, जबकि वर्तमान आयुक्त तरुण राठी ने केवल 70 व्यक्तियों को आरोप पत्र जारी किए हैं। इससे स्पष्ट है कि शेष दोषियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
ज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल और नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज, जबलपुर के कई अधिकारी और कर्मचारी, जिन पर गंभीर आरोप हैं, अब भी अपने पदों पर कायम हैं। इससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
ये है प्रमुख मांगे:
- प्रदेशव्यापी नर्सिंग घोटाले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- दोषी अधिकारियों और स्टाफ को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए।
- चिकित्सा शिक्षा आयुक्त तरुण राठी की भूमिका की उच्चस्तरीय समीक्षा हो।
- प्रतिभा सिंह ठाकुर सहित अन्य दोषियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज कर न्यायिक कार्रवाई की जाए।




