भोपाल के कोलार इलाके में रहने वाली 12वीं कक्षा की छात्रा ने फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया। इससे पहले शुक्रवार की दोपहर को वह स्कूल में अपना बैंक खाता नंबर और आईएफएससी कोड देकर आई। उसने एमपी बोर्ड से 81 प्रतिशत मार्कस के साथ 12वीं कक्षा पास की थी। लिहाजा उसे सरकारी योजना के तहत लैपटॉप के लिए 25 हजार रुपए मिलने वाले थे।
यह राशि शनिवार तक खाते में क्रेडिट होने का आश्वासन स्कूल की ओर से दिया गया था। स्कूल से लौटने के बाद वह गुमसुम थी। इसी बीच परिजन घर से बाहर गए और युवती ने सुसाइड कर लिया। हालांकि पुलिस को घटना स्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। शनिवार दोपहर को पीएम के बाद परिजनों को शव सौंप दिया गया है।
पुलिस के अनुसार, दीक्षा रजक (18) 12वीं की छात्रा थी। उसके पिता चौकीदारी का काम करते हैं। मां भी घरों में हाउस हेल्प का काम करती है। उसका एक छोटा भाई है, जो सबसे बड़ी बहन के घर गया हुआ था। दीक्षा प्रथम श्रेणी से पास हुई थी। शुक्रवार की दोपहर को घर लौटी, तब गुमसुम थी। इसके कुछ देर बाद मां काम कर चली गई। इसके बाद दीक्षा ने सुसाइड कर लिया।
मां घर पहुंची तब देखा शव
शुक्रवार शाम मां घर पहुंची तो सबसे पहले उन्होंने ही बेटी की लाश देखी। जिसके बाद पुलिस को घटना की जानकारी दी। मौके पर पहुंची पुलिस को सुसाइड नोट नहीं मिला है। जिसके चलते आत्महत्या के कारणों का खुलासा नहीं हो सका है। पुलिस का कहना है कि दीक्षा पढ़ने में अच्छी थी और अच्छे नंबर से पास हुई थी। आत्महत्या क्यों की है इसको लेकर जांच की जा रही है। उसके मोबाइल फोन की जांच के बाद और परिजनों के बयान के बाद ही मामले में खुलासा हो सकेगा।
चाचा का सवाल स्कूल से लौटकर ही क्यों जान दी?
मृतका के चाचा रमाकांत रजक ने बताया कि दीक्षा ने कभी कोई परेशानी का जिक्र नहीं किया। वह पढ़ने में भी अच्छी थी। शुक्रवार दोपहर को स्कूल गई थी। वहां उसने अकाउंट नंबर और IFSC कोड भी दिया। शनिवार को उसे सीएम योजना के तहत 25 हजार रुपए मिलने वाले थे। स्कूल से आने के बाद छोटे भाई को बहन के घर छोड़ा। पिता ड्यूटी पर थे, मां भी काम पर चली गई। इसी बीच उसने यह कदम उठा लिया। पता नहीं स्कूल में उसके साथ कुछ गलत हुआ है। इसके अलावा तो कोई और कारण समझ नहीं आ रहा है। पुलिस केस की जांच कर रही है। जांच में ही मौत के कारणों का खुलासा होने की उम्मीद है।




