भोपाल की अरेरा कॉलोनी स्थित शराब दुकान खुलने की शिकायत को मानव अधिकार आयोग नई दिल्ली ने संज्ञान में लिया है। रहवासियों की शिकायत है कि हॉस्पिटल और मंदिर के पास ही शराब दुकान खुली है। इस मामले में 3 अक्टूबर को आयोग में रिपोर्ट पेश होना है। लिहाजा, सोमवार को एडीएम पीसी शाक्य और सहायक आबकारी आयुक्त वीरेंद्रसिंह धाकड़ जांच करने मौके पर पहुंचे।
अफसरों ने करीब एक घंटे तक जांच की। वहीं, रहवासियों के बयान भी लिए। लोगों ने कहा कि दुकान हॉस्पिटल के ठीक पास में है, जबकि मंदिर से 42 मीटर दूर है। रहवासी भूखंड पर नियमों को ताक में रखकर दुकान खोली गई है। जिसका वे लंबे समय से विरोध कर रहे हैं।
नोटिस देकर 15 दिन में मांगी है रिपोर्ट जानकारी के अनुसार, 28 जुलाई को आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो की पीठ ने इस मामले में मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के अंतर्गत संज्ञान लिया था। प्रदेश सरकार को निर्देशित किया गया था कि भोपाल के जिला मजिस्ट्रेट को नोटिस जारी कर शिकायत की जांच कराकर 15 दिन में कार्रवाई प्रतिवेदन प्रस्तुत करें।
जब कोई कार्रवाई नहीं की गई तो 19 अगस्त को फिर से स्मरण पत्र भेजा गया। इस पर आयोग ने आबकारी आयुक्त एवं जिला मजिस्ट्रेट को नोटिस जारी किया। जिसमें 3 अक्टूबर को मानव अधिकार आयोग के दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्यालय में प्रतिवेदन सहित उपस्थित होने का आदेश दिया था। इसके बाद पिछले सप्ताह आबकारी विभाग की टीम मौके पर पहुंची थी। वहीं, सोमवार को एडीएम शाक्य और सहायक आबकारी आयुक्त धाकड़ ने भी जांच की। बयान के दौरान ही रहवासियों ने कहा कि दुकान हटाई जाए। वरना, रहवासी धरना प्रदर्शन करेंगे।
नोटिस के बावजूद कार्रवाई न होना चिंताजनक
कांग्रेस प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने कहा कि आयोग की बार-बार की नोटिस और चेतावनियों के बावजूद जिम्मेदारों ने कार्रवाई नहीं की। यह लापरवाही नहीं, बल्कि साठगांठ है। कैसे एक ही दीवार के सहारे हॉस्पिटल और शराब दुकान का संचालन किया जा सकता है?
शिकायतकर्ता और रहवासी पूर्णेंदु शुक्ला ने कहा कि शराब दुकान धार्मिक स्थल और बच्चों के अस्पताल के पास खुलवाना न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि रहवासियों के अधिकारों का हनन भी है। लवनीश भाटी ने कहा, रहवासी भूखंड पर व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा है।




