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22 लाख की ठगी, भूमाफिया को 7 साल की सजा

भोपाल के भूमाफिया रमाकांत विजयवर्गीय को अपर सत्र न्यायाधीश प्रहलाद सिंह कैमेथिया ने 7 साल की सजा सुनाई है। साथ ही 8 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। आरोपी रमाकांत विजयवर्गीय ने 3 लोगों से कुल 22 लाख 2 हजार रुपए की धोखाधड़ी की थी। जिसकी शिकायत कोहेफिजा थाने में की गई थी। इस मामले में शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक सतीश सिमैया ने पैरवी की है।

आरोपी रमाकांत ने डिस्टिंक्ट इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (डीआईएल) के नाम से कंपनी खोली थी। आरोपी रमाकांत ने एयरपोर्ट रोड पर पंचवटी फेस-3 का निर्माण करना था। इसके लिए उसने कई लोगों से प्लाट बेचने का अनुबंध कर लिया। जबकि वो जमीन आरोपी रमाकांत के नाम पर थी ही नहीं। आगे चलकर आरोपी रमाकांत लोगों के पैसे लेकर फरार हो गया। इसके बाद सरला श्रीवास्तव, राजेंद्र साहू और कनीज फातिमा ने उनके साथ हुई कुल 22 लाख 2 हजार रुपए की धोखाधड़ी की रिपोर्ट कोहेफिजा थाने में दर्ज कराई थी।

यहां बता दें कि रमाकांत ने फरियादियों के साथ 2006 में प्लाट की बिक्री के लिए अनुबंध किया था। वर्ष 2007 में फरियादियों ने उसे 22 लाख 2 हजार रुपए का पेमेंट भी किया था। इस दौरान तय हुआ था कि अगले 18 महीनों के अंदर फरियादियों को प्लाट आवंटित कर​ दिए जाएंगे। लेकिन, 18 महीने से अधिक होने के बाद भी आरोपी रमाकांत विजयवर्गीय ने प्लाट का आवंटन नहीं किया।

जून 2022 में हो चुकी है उम्रकैद

2 जून 2022 को 250 लोगों के साथ 14 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी करने के मामले में रमाकांत को उम्रकैद की सजा हो चुकी है। रमाकांत के खिलाफ धोखाधडी के कुल 84 मामले दर्ज हैं। इनमें से सात-आठ मामलों में वो बरी भी हो चुका है। फिलहाल वो जेल में है। यहां बता दें कि रमाकांत धोखाधड़ी करने के बाद भोपाल से फरार हो गया था और इंदौर के विजय नगर में रह रहा था। कोहेफिजा पुलिस ने उसे इंदौर से गिरफ्तार किया था।

कोर्ट में लगाई थी जमीन की फर्जी पासबुक

एससी-एसटी एक्ट के आरोपी की फर्जी जमानत लेने वाले को 3 साल की कैद

एससी-एसटी एक्ट के आरोपी की जमानत कराने के लिए जमीन की फर्जी पासबुक लगाने के आरोपी रफीक खान को अपर सत्र न्यायाधीश प्रहलाद सिंह कैमेथिया ने 3 साल की सजा और 4 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक सतीष सिमैया ने पैरवी की। मामला 20 फरवरी 2020 को एमपी नगर थाना क्षेत्र का है। दरअसल विशेष न्यायाधीश एमएस चंद्रावत ने एससी-एसटी एक्ट के आरोपी दीपक पाटनकर को 25 हजार रुपए की जमानत पर छोड़ा था। रफीक जमानतदार बना और शमशाबाद निवासी असली रफीक खान की जमीन की पासबुक अपने पास बनवा ली। उसने इस फर्जी पासबुक से जमानत दिलाने की कोशिश की।

कोर्ट में पेश दस्तावेजों से खुलासा हुआ कि पासबुक असली रफीक की है, जबकि जमानत दिलाने वाला रफीक फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल कर रहा था। तत्कालीन न्यायाधीश ने रीडर को जांच के लिए थाने को पत्र लिखने को कहा। जांच में फर्जीवाड़ा साबित होने पर एमपी नगर पुलिस ने रफीक के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया। रीडर ने कोर्ट में उसकी पहचान की। पटवारी ने असली रफीक को सूचना दी तो उसने साफ किया कि वह कभी जमानत लेने भोपाल नहीं आया।

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