कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह शुक्रवार को इंदौर में है। उन्होंने मध्यप्रदेश में बढ़ते सांप्रदायिक तनाव को लेकर इंदौर हाईकोर्ट में याचिका भी लगाई है, जिस पर शुक्रवार को सुनवाई होनी थी, लेकिन अब यह सुनवाई 10 नवंबर को होगी।
मीडिया से चर्चा के दौरान उन्होंने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि एक विधायक के समर्थक मुसलमानों को नौकरी न देने और उनके व्यापार बंद कराने की बात कह रहे हैं। दिग्विजय सिंह ने कहा, क्या यह कानूनन अपराध नहीं है और अगर है तो पुलिस ने अब तक एफआईआर क्यों नहीं की।
उन्होंने कहा कि लोग प्रदर्शन कर रहे हैं और कह रहे हैं कि उनका कसूर सिर्फ इतना है कि वे मुसलमान हैं। जो लोग ईमानदारी से व्यापार कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं, उन्हें धमकाना पूरी तरह से गलत है और इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सिंह ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के एक बयान पर कहा, कैलाश विजयवर्गीय खुद को बहुत संस्कारी और धार्मिक बताते हैं। अगर कोई भाई अपनी बहन से प्यार करता है और उसे गले लगाता है, तो आप इसे गलत अर्थों में क्यों लेते हैं? यह किस सनातन धर्म परंपरा के खिलाफ है? मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं।
एकलव्य ने की मुस्लिम कर्मचारियों को हटाने की अपील
इस मामले में विवाद तब और बढ़ गया जब भाजपा विधायक मालिनी गौड़ के बेटे एकलव्य गौड़ ने व्यापारियों से अपील की कि वे अपनी दुकानों से मुस्लिम कर्मचारियों को हटा दें। गौड़ ने 25 सितंबर तक का अल्टीमेटम दिया था। चेतावनी की समय सीमा खत्म होने के बाद बाजार में असर दिखने लगा है और कई व्यापारियों ने अनिच्छा के बावजूद मुस्लिम कर्मचारियों को काम से हटा दिया है।

दबाव में ऐसा करने को मजबूर व्यापारी
व्यापारियों का कहना है कि वे कर्मचारियों को निकालना नहीं चाहते, लेकिन दबाव में ऐसा करने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि सदियों से कायम आपसी भाईचारे और एकता को खत्म किया जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस पहले ही सक्रिय हो चुकी है।
संभागायुक्त से मिले थे जीतू और वर्मा
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा के नेतृत्व में कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल संभागायुक्त सुदामा खाड़े से मिला था। पटवारी ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने दो दिन में कड़ी कार्रवाई नहीं की, तो कांग्रेस उग्र आंदोलन करेगी।




