राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने प्रदेश के छोटे व्यापारियों के साथ की जाने वाली वसूली और जांच पड़ताल के नाम पर उन्हें परेशान करने के मामले में जांच के निर्देश दिए हैं। आयोग ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर दो हफ्ते में सभी जिलों से रिपोर्ट मंगाकर देने को कहा है।
आयोग ने कहा है कि प्रदेश के शहरी और ग्रामीण इलाकों में मिट्टी के बर्तन विक्रेताओं, फुटपाथ व्यापारियों, फेरीवालों, कुम्हारों, छोटे मिठाई विक्रेताओं, हलवाई, माली, स्थानीय सब्जी विक्रेताओं, रंगोली रंग विक्रेताओं को दिवाली पर्व के दौरान जांच के नाम पर परेशान न किया जाए। इन छोटे व्यापारियों से की जाने वाली अवैध वसूली पर भी नाराजगी जताते हुए आयोग ने मुख्य सचिव से जांच कराने को कहा है।
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के अनुसार शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि भारत के अलग-अलग शहरों में संबंधित नगरपालिका अधिकारियों द्वारा सड़क किनारे विक्रेताओं, फेरीवालों, मिट्टी के बर्तन बेचने वालों के साथ अनावश्यक और अमानवीय व्यवहार करते हुए जांच और कार्रवाई की जा रही है।
उन्हें इस आधार पर बेदखल किया जा रहा है कि वे दमकल गाड़ियों और एम्बुलेंस के रास्ते में बाधा डालते हैं। वे दरअसल दुकानदारों को परेशान करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके चालान, जुर्माना काटे जा रहे हैं और उनसे पैसे ऐंठे जा रहे हैं।
वे स्थानीय दुकानदारों के साथ भी सांठगांठ कर रहे हैं। इससे उनकी कमाई भी बाधित हो रही है क्योंकि वे केवल दिवाली त्योहारों के दौरान ही जरूरी कमाई कर पाते हैं। शिकायतकर्ता ने इस मामले में आयोग के हस्तक्षेप की मांग की है।
आयोग के सदस्य कानूनगो ने लिया संज्ञान आयोग ने कहा है कि शिकायत में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया पीड़ितों के मानवाधिकारों का उल्लंघन प्रतीत होते हैं। इसलिए आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की पीठ ने इस मामले में मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत संज्ञान लिया है।
रजिस्ट्री को मुख्य सचिव को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया है। मुख्य सचिव अनुराग जैन को जारी नोटिस में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने कहा है कि मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग भारत को देश के सभी मनुष्यों के अधिकारों की रक्षा और संवर्धन की जिम्मेदारी सौंपी है और PHR अधिनियम, 1993 की धारा 13 के तहत जाच के लिए सिविल कोर्ट के अधिकार भी दिए हैं।
सीएस से कहा, आरोपों की जांच कराएं और कार्यवाही करें आयोग ने देश के सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों के सचिवों को निर्देशित किया है शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कराएं और सभी जिलाधिकारियों, नगरपालिका अधिकारियों को निर्देश दें कि वे स्थानीय मिट्टी के बर्तन विक्रेताओं, अन्य फुटपाथ व्यापारियों, फेरीवालों, कुम्हारों, छोटे मिठाई विक्रेताओं, हलवाई, माली, स्थानीय सब्ज़ी विक्रेताओं, रंगोली रंग विक्रेताओं आदि को परेशान करने से बचें, क्योंकि अधिकारियों का ऐसा कृत्य भारत सरकार की वोकल फॉर लोकल पहल की भावना के विरुद्ध है। आयोग ने कहा है कि अधिकारी अग्नि-प्रभावित क्षेत्रों में किसी भी आपात स्थिति में पहुंच के लिए आवश्यक प्रमुख स्थानों के अनुरूप, अग्निशमन उपायों की व्यवस्था करेंगे।
उचित स्थान देने के साथ दुर्घटना से बचाव का भी इंतजाम करेंगे यह भी निर्देश दिया है कि इन स्थानीय मिट्टी के बर्तन विक्रेताओं, अन्य फुटपाथ व्यापारियों, फेरीवालों, कुम्हारों, छोटे मिठाई विक्रेताओं, माली, स्थानीय सब्जी विक्रेताओं, रंगोली रंग विक्रेताओं आदि के लिए सुविधाओं का ध्यान रखा जाए।
अगर जरूरी हो तो अग्निशमन, एम्बुलेंस आदि जैसी आपातकालीन सेवाओं तक पहुंच में बाधाओं के कारण फुटपाथों से विस्थापित होने की स्थिति में उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराया जाए।
यह भी निर्देश दिया है कि उपयुक्त स्थान सभी सुरक्षा उपायों से सुसज्जित हों। स्थानीय प्रशासन द्वारा दीपावली के त्यौहारी मौसम के दौरान उपर्युक्त गरीब विक्रेताओं, विक्रेताओं के विरुद्ध कोई चालान, जुर्माना, माल की जब्ती, कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी।
ये निर्देश केवल दिवाली के त्यौहारी मौसम के दौरान ही लागू किए जाएंगे और इन्हें पूरे वर्ष के लिए एकमुश्त दुरुपयोग के रूप में नहीं लिया जाएगा। आयोग ने दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है।




