भोपाल में 21 वर्षीय युवक की मौत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कुत्ते के काटने को मामूली समझने की गलती जानलेवा हो सकती है। तीन माह पहले हुए डॉग-बाइट के बाद जब युवक ने एंटी-रैबीज के सभी इंजेक्शन नहीं लगवाए, तो इसका नतीजा धीरे-धीरे सामने आने लगा।
पहले बुखार, फिर बेचैनी और आखिर में पानी से डर। यह सभी क्लासिक रैबीज के लक्षण हैं, जिनका पता परिजन को तब चला, जब हालत बिगड़ चुकी थी। युवक को हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन शरीर में फैल चुके संक्रमण के कारण दो दिन बाद उसकी मौत हो गई।
लक्षण बढ़ने पर परिजन पहुंचे हमीदिया अस्पताल
भोपाल के रहने वाले 21 वर्षीय भईया खान की रैबीज के कारण मौत हो गई। तीन महीने पहले कुत्ते के काटने की घटना को युवक और परिवार ने गंभीरता से नहीं लिया। दस दिन पहले उसे हल्का बुखार आया, जिसे परिवार ने मौसम का असर समझकर दो दिन तक पैरासिटामॉल दी।
लेकिन धीरे-धीरे उसकी हालत बिगड़ने लगी। बुखार के तीसरे-चौथे दिन अचानक वह पानी से डरने लगा। आसपास के लोगों ने बताया कि भईया का व्यवहार बदल गया था और वह अजीब हरकतें करने लगा। स्थिति को गंभीर समझते हुए परिवार उसे हमीदिया अस्पताल की इमरजेंसी में लेकर पहुंचा।
फ्रैक्चर के कारण नहीं कर सका था बचाव स्थानीय निवासी शहीद खान ने बताया कि तीन महीने पहले भईया का एक्सीडेंट हुआ था, जिसमें उसका दाहिना पैर फ्रैक्चर हो गया था। उसका इलाज हमीदिया अस्पताल में हुआ था और पैर पर प्लास्टर चढ़ा था। इसी बीच एक सुबह वह घर के बाहर बैठा था, तभी कुछ आवारा कुत्ते लड़ते हुए उसके पास आ गए और उनमें से एक ने उसके बाएं पैर पर काट लिया। चोट इतनी अचानक हुई कि वह बचाव भी नहीं कर सका।
कुछ दिन बाद कुत्ता मर गया और यही रैबीज संक्रमण के स्रोत की सबसे बड़ी चेतावनी थी, जो उस समय समझ नहीं आई।
एंटी-रैबीज का पूरा कोर्स नहीं लिया शहीद खान ने बताया कि भईया ने पास के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज कराया था, लेकिन उसने एंटी-रैबीज के केवल एक या दो इंजेक्शन ही लगवाए। रैबीज वैक्सीन का पूरा कोर्स पांच इंजेक्शनों का होता है, जिसे समय पर पूरा करना जरूरी है।
पूरा कोर्स न लेने की वजह से वायरस शरीर में सक्रिय रहा और धीरे-धीरे बढ़ता गया। लक्षण दिखने तक संक्रमण इतना फैल चुका था कि इलाज लगभग असंभव हो चुका था।
दो दिन चला इलाज, बचाया नहीं जा सका हमीदिया अस्पताल के अनुसार, भईया खान को 23 नवंबर को गंभीर हालत में लाया गया। डॉक्टरों ने तुरंत उसे आईसीयू-1 में शिफ्ट किया, जहां दो दिन तक इलाज चलता रहा। अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि जब मरीज पहुंचा, तब तक पूरी बॉडी में इन्फेक्शन फैल चुका था। रैबीज के लक्षण शुरू होने के बाद उपचार संभव नहीं होता। हम कोशिश करते रहे, लेकिन उसे नहीं बचाया जा सका।
परिजन यह मानने को तैयार नहीं थे कि एक छोटा-सा डॉग-बाइट युवक की जान ले सकता है, लेकिन रैबीज अपने अंतिम चरण में लगभग 100% जानलेवा होता है।
कुत्ते के काटने पर न करें अनदेखी
- कुत्ते का काटना इमरजेंसी मेडिकल कंडीशन है।
- घाव को 15 मिनट तक साबुन-पानी से धोना जरूरी।
- एंटी-रैबीज वैक्सीन का पूरा कोर्स अनिवार्य।
- काटने वाला कुत्ता मर जाए तो खतरा और बढ़ जाता है।
- रैबीज के लक्षण दिखने के बाद बचाव की संभावना लगभग शून्य होती है।




