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नाराज अतिथि शिक्षक अब सड़कों पर जताएंगे विरोध

मध्यप्रदेश में कार्यरत अतिथि शिक्षक सरकार की ओर से की गई घोषणाएं पूरी न होने से नाराज हैं। अतिथि शिक्षक प्रदेशव्यापी आंदोलन की तैयारी में जुट गए हैं। भोपाल में आयोजित प्रदेश स्तरीय बैठक में अतिथि शिक्षक समन्वय समिति ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि 25 दिसंबर 2025 से 25 जनवरी 2026 तक सभी संभागों में सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद 31 जनवरी को राजधानी भोपाल में सरकार के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। संगठन का आरोप है कि भाजपा सरकार ने विधानसभा और सार्वजनिक मंचों से किए गए वादों को पूरा नहीं किया।

अतिथि शिक्षक समन्वय समिति के संस्थापक पी.डी. खैरवार के निर्देशानुसार भोपाल में हुई प्रदेश स्तरीय बैठक में अध्यक्ष सुनील परिहार सहित सभी पदाधिकारियों ने आंदोलन की रूपरेखा तय की। बैठक में तय किया गया कि पहले संभागीय स्तर पर सम्मेलन कर अतिथि शिक्षकों को एकजुट किया जाएगा, ताकि आंदोलन को व्यापक समर्थन मिल सके।

स्कूल शिक्षा मंत्री के बयान से नाराजगी बैठक में वक्ताओं ने कहा कि विधानसभा में स्कूल शिक्षा मंत्री के हालिया बयान से अतिथि शिक्षकों में गहरा असंतोष है। मंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा अतिथि शिक्षकों को विभागीय परीक्षा के माध्यम से नियमित करने और सीधी भर्ती में बोनस अंक देने की घोषणाओं को पूरा करने में असमर्थता जताई है। शिक्षकों का कहना है कि तब भी और अब भी प्रदेश में भाजपा की ही सरकार है, तो घोषणाएं पूरी न होने का कारण समझ से परे है।

प्रदेश महासचिव चंद्रशेखर राय ने कहा कि यदि सरकार वादे निभाने की स्थिति में नहीं है, तो उसे मीडिया के सामने स्वीकार करना चाहिए कि घोषणाएं झूठी थीं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में अतिथि शिक्षक आंदोलन नहीं करेंगे, लेकिन आधे अधूरे आश्वासनों से शिक्षकों का भविष्य अंधेरे में डाला जा रहा है।

कैबिनेट निर्णय से बढ़ा असमंजस

प्रदेश सचिव रविकांत गुप्ता ने कहा कि कैबिनेट के उस निर्णय से अतिथि शिक्षक असमंजस में हैं, जिसमें केवल तीन कैडर रखने और अन्य व्यवस्थाओं को समाप्त करने की बात कही गई है। वर्तमान में अतिथि शिक्षक अंशकालीन व्यवस्था के तहत कार्य कर रहे हैं, जबकि कई शिक्षक 15 से 17 वर्षों से सेवा दे रहे हैं।

संविदा शिक्षक बनाने की मांग तेज संगठन ने मांग की कि अतिथि शिक्षकों को संविदा शिक्षक का दर्जा दिया जाए। नेताओं का कहना है कि वर्षों का अनुभव रखने वाले शिक्षकों को अस्थायी व्यवस्था में रखना अन्याय है और इससे शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।

पदाधिकारी बी.एम. खान ने कहा कि विधायक रहते मुख्यमंत्री मोहन यादव स्वयं अनुभवी अतिथि शिक्षकों को संविदा शिक्षक बनाने की अनुशंसा कर चुके हैं। अब मुख्यमंत्री बनने के बाद उनसे उम्मीद है कि वे अतिथि शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित करेंगे। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं हुआ, तो 31 जनवरी का प्रदर्शन और तेज किया जाएगा।

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