सात हजार 618 करोड़ रुपये का किसानों को मिला है खरीफ 2020 और रबी 2020-21 का फसल बीमा
जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों द्वारा अल्पावधि ऋण में समायोजित की जा रही है राशि
भोपाल (राज्य ब्यूरो)। मध्य प्रदेश में खरीफ 2020 और रबी 2020-21 की फसल बीमा राशि (सात हजार 618 करोड़ रुपये) किसानों के खातों में बीमा कंपनियों ने जमा करा दी है, पर यह राशि किसान निकाल नहीं पा रहे हैं। दरअसल, बैंक बीमा की राशि से कर्ज वूसली कर रहे हैं। इसके कारण किसानों में नाराजगी भी है, क्योंकि उन किसानों से भी राशि वसूली जा रही है जो नियमित भुगतान करते आ रहे हैं या उनके द्वारा खरीफ फसलों के लिए गए अल्पावधि कृषि ऋण चुकाने की अंतिम तारीख 28 मार्च 2022 है।
नियमानुसार ऐसे किसानों से बिना सहमति के फसल बीमा की राशि से ऋण का समायोजन नहीं किया जा सकता है। सहकारिता मंत्री डा.अरविंद सिंह भदौरिया का भी कहना है कि डिफाल्टर किसानों से ही वसूली होगी। बाकी किसानों के साथ कर्ज वसूली के लिए सहमति जरूरी होगी। किसी भी किसान से जबरदस्ती वसूली नहीं होगी।
प्रदेश के 38 जिला सहकारी केंद्रीय बैंक साढ़े चार हजार प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को खरीफ और रबी फसलों के लिए अल्पावधि ऋण साख सीमा के अनुसार देते हैं। इसमें 75 प्रतिशत ऋण नकद राशि और 25 प्रतिशत सामग्री के रूप में मिलता है।खरीफ सीजन का ऋण 28 मार्च और रबी सीजन का 15 जून तक चुकाना होता है। इसके बाद फिर ब्याज रहित ऋण नए सिरे से मिल जाता है।
भोपाल जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के पूर्व अध्यक्ष विजय तिवारी का कहना है कि किसान को ऋण फसल को लिए मिलता है, इसलिए उनका अनिवार्य रूप से बीमा कराया जाता है। इसके पीछे मकसद यही रहता है कि जब प्राकृतिक आपदा की वजह से फसल प्रभावित हो तो बीमा राशि से भरपाई हो जाए।
ऋण राशि का समायोजन होने के बाद किसान को आगामी सीजन के लिए फिर ऋण मिल जाता है। यह क्रम चलता रहता है पर किसान की सहमति अनिवार्य है। सहकारिता विभाग के भी स्थायी निर्देश हैं कि डिफाल्टर किसानों से फसल बीमा की राशि से शत प्रतिशत ऋण का समायोजन किया जाए। जो किसान नियमित ऋण अदायगी करते हैं, उनसे सहमति लेकर ही फसल बीमा की राशि से ऋण का समायोजन किया जा सकता है। स्पष्ट निर्देश होने के बाद भी ऋण का समायोजन फसल बीमा की राशि से किया जा रहा है।
किसानों के हित में काम करने वाली सरकार = भदौरिया
सहकारिता मंत्री भदौरिया का कहना है कि यह किसानों के हित में काम करने वाली सरकार है। उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं आने दी जाएगी। जब खरीफ 2020 की फसल अतिवर्षा से प्रभावित हुई थी तो केंद्र सरकार से अनुरोध करके बीमा पोर्टल को खुलवाकर किसानों का पंजीयन कराया था। रविवार को बैंकों की शाखाएं खुलवाकर प्रीमियम राशि जमा कराई थी। इसकी वजह से सर्वाधिक फसल बीमा भी मिला है। डिफाल्टर किसानों से ही कर्ज की वसूली फसल बीमा की राशि से होगी। शेष के लिए सहमति के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
दिग्विजय सिंह ने भी लगाया था आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी आरोप लगाया कि किसानों से सहमति लिए बिना ही बीमा की राशि का ऋण में समायोजन किया जा रहा है, जबकि इसको लेकर नियम स्पष्ट है। उन किसानों से भी ऋण वसूली हो रही है, जिन्हें मार्च 2022 तक अल्पावधि कृषि ऋण चुकाना है। उन्होंने दावा किया कि यह बात किसानों से इंटरनेट मीडिया के माध्यम से किए संवाद में सामने आई है।




