स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत स्कूलों व छात्रावासों में काम कर रहे अंशकालीन, अस्थायी और आउटसोर्स कर्मचारियों के न्यूनतम वेतन और नियमितिकरण की मांग को लेकर आंदोलन जोर पकड़ने लगा है। इसी के चलते राजधानी में डायरेक्टोरेट ऑफ पब्लिक इंस्ट्रक्शन (DPI) कार्यालय का घेराव किया गया।
अस्थायी-आउटसोर्स कर्मचारी मोर्चा के बैनर तले हुए प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने कहा कि वे पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से सेवाएं दे रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें मात्र 4 से 5 हजार रुपए मासिक वेतन दिया जा रहा है जो शासन द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन से भी कम है।
कर्मचारियों ने आरोप लगाते हुए कहा कि लंबे समय से मांग उठाने के बावजूद शासन और विभागीय अधिकारियों द्वारा उनकी समस्याओं पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। अस्थायी, आउटसोर्स कर्मचारी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने कहा कि एमपी में चतुर्थ श्रेणी के लोगों को अलग-अलग नाम से रखा है और अलग-अलग कैडर बनाकर शोषण कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि चपरासी का एमपी में कैडर नहीं है। जो सरकार चपरासियों का कैडर तय कर समान वेतन तय नहीं किया जा सका है। 20 साल से काम करने वालों को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बनाया जाए। लोक शिक्षण आयुक्त से प्रदर्शन कर इस अन्याय को खत्म करने की मांग की गई है।
प्रदर्शन कारियों की मांगें सरकार को न्यूनतम वेतन लागू करना चाहिए़ जो शासन द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन से भी कम है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से मांग उठाने के बावजूद शासन और विभागीय अधिकारियों द्वारा उनकी समस्याओं पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।




