बैंक से लिया गया लोन कारोबार में लगाने की बजाय दूसरी जगह इस्तेमाल कर लिया। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने इंदौर की यशास FRP मैन्युफैक्चरिंग एलएलपी के संचालकों पर 3 करोड़ 57 लाख रुपए की धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। आरोप है कि कंपनी ने बैंक से लिए गए ऋण की शर्तों का उल्लंघन करते हुए रकम का दुरुपयोग किया।
ईओडब्ल्यू एसपी रामेश्वर यादव के मुताबिक, मामले में कंपनी के संचालक संजय रामप्रकाश गुप्ता और शालिनी संजय गुप्ता को नामजद आरोपी बनाया गया है। कंपनी पर बैंक ऑफ बड़ौदा और औद्योगिक विकास निगम के साथ वित्तीय हेराफेरी का आरोप है।
जांच में सामने आया कि कंपनी का मुख्य कार्यालय आरएनटी मार्ग स्थित मिलिंदा मैनोर की दूसरी मंजिल पर था। यहां फाइबर ग्लास से रैलिंग, सीढ़ियां, ट्रे, पंखे समेत अन्य उत्पादों का निर्माण किया जाता था। हालांकि कंपनी 2013 में ही बंद हो चुकी थी, इसके बावजूद इसके खातों से भारी लेनदेन किया गया।
ईओडब्ल्यू के अनुसार, यशास FRP ने 2013 से 2015 के बीच करीब 11 करोड़ रुपए का ऋण लिया था। इसमें टर्म लोन, वर्किंग कैपिटल, कैश क्रेडिट और एक्सपोर्ट पैकेजिंग क्रेडिट शामिल थे। 16 दिसंबर 2013 से 31 मार्च 2016 के बीच कैश क्रेडिट खाते से बड़ी मात्रा में नकद निकासी की गई, जबकि नियमों के अनुसार यह राशि सिर्फ व्यावसायिक कार्यों में ही उपयोग की जानी थी।
सबसे गंभीर बात यह रही कि निर्यात के नाम पर स्वीकृत 2.95 करोड़ रुपए का कोई एक्सपोर्ट नहीं किया गया। इसके अलावा टर्म लोन से खरीदी गई CNC स्ट्रक्चरल FRP एक्सट्रूडर मशीन को बेच दिया गया और उसकी राशि भी बैंक में जमा नहीं की गई।
मामले की विस्तृत जांच के बाद ईओडब्ल्यू ने सोमवार को संजय गुप्ता और शालिनी गुप्ता के खिलाफ धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज कर लिया।




