भोपाल |भोपाल की लाइफलाइन ‘बड़े तालाब’ को प्रदूषण और अवैध कब्जों से मुक्त कराने के लिए सोमवार को कलेक्टोरेट में बड़ी हलचल रही। सांसद आलोक शर्मा ने अफसरों की क्लास लेते हुए दो टूक कहा कि तालाब को लैंड जिहाद और अतिक्रमण की भेंट नहीं चढ़ने दिया जाएगा। बैठक में तब असहज स्थिति पैदा हो गई जब कलेक्टर के एक सीधे सवाल पर एसडीएम निरुत्तर हो गए।
अफसरों की चुप्पी और सांसद के तीखे सवाल
बैठक में सांसद ने जब तालाब के सिकुड़ते दायरे (31 वर्ग किमी से घटकर 9 वर्ग किमी) पर चिंता जताई, तो कलेक्टर कौशलेंद्र सिंह ने एसडीएम से पूछा— “तालाब के पास अब कितना अतिक्रमण बचा है?” इस पर सभी एसडीएम एक-दूसरे का मुंह ताकने लगे। सांसद ने एनजीटी के आदेशों की अनदेखी पर भी सवाल उठाए और पूछा कि आखिर तालाब किनारे अवैध फॉर्म हाउस और मकान कैसे तन रहे हैं?
वक्फ बोर्ड को लेकर तल्ख तेवर
सांसद शर्मा ने शहर के विकास कार्यों में वक्फ बोर्ड के हस्तक्षेप पर भी कड़ा एतराज जताया। उन्होंने कहा:
“आज पूरा भोपाल जैसे वक्फ की जागीर हो गया है। मेट्रो लाइन हो, स्मार्ट रोड हो या बस स्टैंड— हर जगह वक्फ की जमीन बताकर रोड़ा अटकाया जाता है। अब भोपाल में वक्फ या ‘इनायत हिब्बे’ के नाम पर गुंडागर्दी और लैंड जिहाद नहीं चलेगा।”
तालाब बचाने का ‘एक्शन प्लान’
- रिपोर्ट्स होंगी सार्वजनिक: सेप्ट (SEPT) और केपीएमजी जैसी संस्थाओं की पुरानी सर्वे रिपोर्ट्स को सार्वजनिक किया जाएगा।
- हफ्तेभर की मोहलत: कलेक्टर ने चारों एसडीएम को एक सप्ताह का समय दिया है ताकि बड़े तालाब किनारे के सभी बड़े (प्राइमा फेसी) अतिक्रमण हटाए जाएं।
- नया मास्टर प्लान: तालाब का नए सिरे से सर्वे कर लैंड यूज तय होगा ताकि ‘विरासत से विकास’ का संकल्प पूरा हो सके।
अब हर हफ्ते होगी समीक्षा: प्रशासन अब केवल कागजी कार्रवाई नहीं करेगा। कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि हर सप्ताह अतिक्रमण हटाओ मुहिम और सीवेज रोकने के कार्यों की समीक्षा की जाएगी।




