टैंकर में भरे दूध की गुणवत्ता में अंतर मिलने और उस पर की गई कार्रवाई में भोपाल सहकारी दुग्ध संघ के कुछ अधिकारी खुद उलझते जा रहे हैं। टैंकर मालिक सुमेर सिंह ने संयंत्र संचालन के महाप्रबंधक भरत अरोरा द्वारा दिए नोटिस के जवाब में कहा है कि जब दूध की जांच संघ के छह अधिकारी-कर्मचारी और उसकी खुद की मौजूदगी में कराई थी तब रिपोर्ट ठीक थी। गुणवत्ता अच्छी थी, कोई अंतर नहीं था। सबके सामने सैंपल लेने व जांच कराने का पंचनामा बनाया था। रात दो बजे अचानक अकेले में दोबारा एक अधिकारी द्वारा जांच कराई गई है। अब दूध की गुणवत्ता में अंतर बताया जा रहा है। यह फंसाने की साजिश है। भरत अरोरा द्वारा किए गए औचक जांच व सैंपलिंग को भी खारिज किया है और संघ के सीसीटीवी फुटेज दिखवाने की मांग की है।
यह है मामला
टैंकर एमपी 04 जीबी 2799 भोपाल सहकारी दुग्ध संघ से अनुबंधित है जो मार्ग क्रमांक दो पर चलता है। इस मार्ग पर दूध संकलन समितियों से दूध एकत्रित ब्लक मिल्क कूलरों में रखा जाता है जहां से टैंकर में लोड होकर संघ के भोपाल स्थिति प्लांट में लाया जाता है। यह काम रोज होता है। यह टैंकर सोमवार रात को दूध लेकर पहुंचा था। जिसकी जांच कराई गई थी। दुग्ध संघ्ा के भरत अरोरा का दावा है कि दूध की गुणवत्ता में अंतर मिला है।
नितिन को किया है निलंबित
इस मामले में दुग्ध संघ के सीईओ आरपीएस तिवारी ने दूध की जांच करने के मामले में प्रयोगशाला सहायक नितिन धुर्वे को निलंबित किया था उसका कार्यालय अब तक नहीं मिला है। टैंकर मालिक सुमेर सिंह को भरत अरोरा ने नोटिस दिया था। तीन दिन में जवाब मांगा था जो वह दे चुका है।
सवाल
01 – दुग्ध संघ की तरफ से खुद कहा जा रहा है कि दूध की गुणवत्ता ठीक नहीं थी तो उसे खाली कैसे कराया, विशेषज्ञ यह सवाल उठा रहे हैं।
02- दुग्ध संघ से अनुबंधित टैंकरों पर बार-बार आरोप लगते रहे हैं, यह सिलसिला आखिर कब तक खत्म होगा।
03- टैंकरों से किए जा रहे दूध के परिवहन को लेकर बीते महीनों में किए गए प्रयासों पर कैसे भरोसा किया जाए।
04- प्रयोगशाला में की जा रही जांच और वहां कार्यरत कुछ अधिकारी कर्मचारियों पर सवाल उठते रहे हैं। इस पर उपभोक्ता विश्वास कैसे करें।




