मध्य प्रदेश राज्य साइबर पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युवाओं को नौकरी का झांसा देकर मानव तस्करी करने वाले एक खतरनाक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। यह नेटवर्क बेरोजगार युवाओं को थाईलैंड में ऊंचे वेतन वाली नौकरी का लालच देकर उन्हें म्यांमार के ‘स्कैम सेंटर्स’ में बेच देता था। प्रदेश में यह अपनी तरह का पहला मामला है जिसमें एमिग्रेशन एक्ट, मानव तस्करी और आईटी एक्ट की सख्त धाराएं एक साथ लगाई गई हैं।
बिहार और यूपी के दो एजेंट गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को दबोचा है। एक की गिरफ्तारी बिहार से हुई है, जबकि दूसरे को दिल्ली एयरपोर्ट पर लुकआउट सर्कुलर के जरिए पकड़ा गया। इनके पास से डिजिटल उपकरण और कई संदिग्ध दस्तावेज मिले हैं।
भोपाल के युवक की आपबीती: डेटा एंट्री के नाम पर म्यांमार में टॉर्चर
जांच में खुलासा हुआ कि भोपाल के एक युवक को फेसबुक और व्हाट्सएप के जरिए डेटा एंट्री जॉब का ऑफर दिया गया। ऑनलाइन इंटरव्यू के बाद उसे थाईलैंड भेजा गया, जहां से उसे अवैध रूप से म्यांमार ले जाकर एक गिरोह को बेच दिया गया। वहां उसे बंधक बनाकर मारपीट की गई और जबरन साइबर ठगी करवाई गई। अंततः म्यांमार की सेना की मदद से उसे मुक्त कराया जा सका।
सोशल मीडिया पर बिछाया जाता है जाल
यह गिरोह फेसबुक, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम पर सक्रिय रहता है। युवाओं को 30 से 40 हजार थाई बाथ (विदेशी मुद्रा) का लालच देकर फंसाया जाता है। म्यांमार, लाओस और कंबोडिया की सीमाओं पर ऐसे कई ठिकाने हैं, जहां भारत सहित 30 देशों के युवाओं को ‘साइबर गुलाम’ बनाकर रखा जा रहा है।
एडवाइजरी: किसी भी अनजान एजेंट के झांसे में न आएं। विदेश जाने से पहले सरकारी रजिस्ट्रेशन की जांच जरूर करें। संदेह होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें।




