भोपाल। राजधानी के मानस भवन के पीछे से हटाई गई 70 साल पुरानी आदिवासी बस्ती के परिवारों को मालीखेड़ी में शिफ्ट किए जाने के बाद विवाद गहरा गया है। जिला प्रशासन द्वारा शनिवार को हटाए गए 27 परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत मालीखेड़ी में पक्के मकान तो दे दिए गए, लेकिन स्थानीय लोगों और हिंदूवादी संगठनों के विरोध के चलते यहाँ तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।
विरोध और सुरक्षा की मांग
मालीखेड़ी के स्थानीय निवासियों का कहना है कि नए आए परिवारों का पहले पुलिस वेरिफिकेशन होना चाहिए। विस्थापित परिवारों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि रात के समय कुछ लोग हथियार लेकर बस्ती में घूमते हैं और उन्हें डराने की कोशिश कर रहे हैं। शिफ्टिंग के दौरान भी सामान उतारने को लेकर काफी नोकझोंक हुई थी, जिसे पुलिस ने हस्तक्षेप कर शांत कराया।
विस्थापन के बीच मौत, पुलिस में शिकायत
बस्ती हटाए जाने के दौरान बीमार हुई एक बुजुर्ग महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई, जिनका अंतिम संस्कार सोमवार को मालीखेड़ी में ही किया गया। इस पूरे मामले पर राजनीति भी गर्मा गई है। नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
मुख्य मुद्दे:
- दहशत का साया: विस्थापितों का आरोप है कि उन्हें रात में डराया जा रहा है।
- प्रशासनिक तर्क: वार्ड पार्षद का कहना है कि वेरिफिकेशन की मांग पुराने विवादों के कारण की गई थी।
- मुआवजे की मांग: परिवारों का आरोप है कि बलपूर्वक कार्रवाई में उनका घरेलू सामान टूट गया और कई कीमती वस्तुएं गायब हो गई हैं।




