विदिशा में साइबर ठगी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। ठगों ने एयरटेल प्रतिनिधि और सीबीआई अधिकारी बनकर 70 वर्षीय रिटायर्ड बिजली कंपनी कर्मचारी प्रदीप कपाड़े और उनकी पत्नी को 23 दिनों तक उनके ही घर में डिजिटल अरेस्ट रखा और 69.27 लाख रुपए ठग लिए। पुलिस ने मामला दर्ज कर 23 लाख रुपए फ्रीज करवा दिए हैं और आरोपियों की तलाश के लिए 5 टीमें गठित की हैं।
घटना की शुरुआत 5 अक्टूबर को हुई जब ठगों ने एयरटेल प्रतिनिधि बनकर फोन किया और मुंबई के कोलाबा थाने में फर्जी सिम व एफआईआर दर्ज होने की बात कही। इसके बाद कॉल फर्जी सीबीआई अधिकारी को ट्रांसफर कर दिया गया। आरोपियों ने आधार स्कैन करवाकर मामले को करोड़ों के मनी लॉन्ड्रिंग केस यानी नरेश गोयल मामले से जोड़ दिया और दंपती को जेल भेजने की धमकी दी। 5 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक बुजुर्ग दंपती को वीडियो कॉल के जरिए लगातार निगरानी में रखा गया। रोज सुबह 9:30 बजे कॉल आता था और मोबाइल पर फर्जी अदालत की सुनवाई का नाटक दिखाया जाता था। डर के मारे दंपती ने 23 दिनों तक अपने घर के दरवाजे और खिड़की बंद रखे और किसी से भी कोई बात नहीं की।
ठगों के निर्देश पर दंपती ने अपनी एफडी तुड़वाकर पूरी रकम सेविंग खाते में मंगाई। इसके बाद 6 अक्टूबर से 22 अक्टूबर के बीच 8 अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए 7 से 8 अलग-अलग खातों में कुल 69.27 लाख रुपए ट्रांसफर करवा लिए गए। हर बार ठग दो दिन में रकम वापस लौटाने का झूठा भरोसा देते रहे।
मामला तब खुला जब 28 अक्टूबर को एसबीआई बैंक ने संदिग्ध ट्रांजेक्शन मानकर खाते में 16 लाख रुपए होल्ड कर दिए। ठगों के कहने पर जब प्रदीप कपाड़े बैंक का होल्ड हटवाने सिविल लाइन थाने पहुंचे, तो पुलिस को शक हुआ। पुलिस की कड़ी पूछताछ के बाद 23 दिन की पूरी आपबीती सामने आ गई। विदिशा एसपी रोहित काशवानी के निर्देश पर पुलिस ने आरोपियों के खातों में मौजूद 23 लाख रुपए फ्रीज करा दिए हैं। एडिशनल एसपी मोनिका तिवारी ने मामले की पुष्टि करते हुए जनता से अपील की है कि कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। सीबीआई या पुलिस कभी भी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती है, इसलिए ऐसा कोई भी कॉल आने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या नजदीकी पुलिस को सूचित करें।




