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जांच के बाद ईओडब्ल्यू ने दर्ज की एफआईआर

ईओडब्ल्यू ने भोज मुक्त विश्वविद्यालय के तात्कालीन निदेशक और प्रभारी कुलसचिव प्रवीण जैन सहित अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों पर धोखाधड़ी, षड्यंत्र और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है। आरोप है कि जैन ने अल्पकालिक प्रभार का दुरुपयोग कर 66 कर्मचारियों की नियम विरुद्ध नियुक्तियां और नियमितीकरण किए।

ईओडब्ल्यू के अनुसार, डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर के आवास अधिकारी सुधाकर सिंह राजपूत ने 25 फरवरी 2020 को शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि जैन ने नियमों और प्रक्रियाओं की अनदेखी करते हुए बड़ी संख्या में दैनिक वेतनभोगी और संविदा कर्मियों को अवैध रूप से नियमित किया। यह नियुक्तियां बिना शासकीय स्वीकृति, पद सृजन और चयन प्रक्रिया के की गईं, जिससे शासन को नुकसान हुआ।

जांच में सामने आया कि 2013-14 में कुलसचिव की अनुपस्थिति के दौरान जैन को मात्र एक-एक दिन (01 अक्टूबर 2013 और 27 नवंबर 2014) के लिए अस्थायी प्रभार दिया गया था। शासन के आदेशानुसार ऐसा प्रभार निदेशक जैसे शैक्षणिक पदाधिकारी को देना ही अनुचित था।

भ्रामक आदेश जारी कर कीं अवैध नियुक्तियां 05 अक्टूबर 2013 को उच्च शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर सभी नियमितीकरण तत्काल निरस्त करने के निर्देश दिए थे, लेकिन जैन ने आदेश को स्थगित बताया और नियुक्तियां जारी रहीं। उन्होंने कुछ कर्मचारियों को प्रतिनियुक्ति योग्य पदों पर सीधी नियुक्ति दी और कई को गलत पद वर्ग में समायोजित किया। सरकार की अनुमति के बिना पदों का अवैध सृजन भी किया गया, जो विश्वविद्यालय अधिनियम का उल्लंघन है।

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