स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) में पीछे चल रहे भोपाल ने रफ्तार पकड़ ली है। मंगलवार रात तक जिले की सभी 7 विधानसभा में 44% डिजिटलाइजेशन हो चुका है। इनमें बैरसिया विधानसभा में डिजिटलाइजेशन का काम सबसे ज्यादा 76% हुआ। इधर, कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने एक बीएलओ को सस्पेंड कर दिया।
डिजिटलाइजेशन बढ़ाने के लिए अब सहायक रिटर्निंग अधिकारी यानी, एसडीएम नए-नए प्रयोग कर रहे हैं। गोविंदपुरा एसडीएम एवं उप जिला निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता ने भी नया प्रयोग किया। उन्होंने बताया कि नरेला विधानसभा में नारायण श्री होम्योपैथिक कॉलेज के कई बच्चों ने वॉलिंटियर्स के रूप में इस काम में भागीदारी की है।
दरअसल, अशोका गार्डन से 80 फीट रोड, पुष्पा नगर-रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म नंबर-1 तक करीब 30 बीएलओ काम में लगे हैं। इनमें से 14 बीएलओ ऐसे हैं, जिनका काम कम हुआ है। इसलिए इनके साथ कॉलेज के 5-5 बच्चों की टीम बुधवार से मैदान में उतरेगी और बीएलओ की फॉर्म का डिजिटलाइजेशन करेगी।
एक दिन में 7% बढ़ा काम बता दें कि सात विधानसभा सीटों में 21 लाख 25 हजार 908 वोटर हैं। इनमें से 20.91 लाख फॉर्म बांटे जा चुके हैं। 19 नवंबर तक की स्थिति में फॉर्म की वापसी का प्रतिशत 7.37 ही था। सोमवार सुबह तक की स्थिति में यह 37% पहुंच गया। वहीं, अगले ही दिन मंगलवार को 7% की बढ़ोतरी के बाद यह 44% हो गया। अगले 10 दिन में सभी फॉर्म को डिजिटलाइज करने का टारगेट है।
आंकड़ों के अनुसार, बैरसिया में 76%, भोपाल उत्तर में 42.5%, नरेला में 38%, भोपाल दक्षिण-पश्चिम में 34%, भोपाल मध्य में 34%, गोविंदपुरा में 35.6% और हुजूर में 48% डिजिटलाइजेशन का काम हुआ है।
बीएलओ ने लापरवाही की, इसलिए कार्रवाई कलेक्टर ने भोपाल दक्षिण-पश्चिम के बीएलओ अजीत सिंह बुंदेला को अपने दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही बरतने पर निलंबित कर दिया।
बुंदेला निर्धारित समय सीमा में मतदाता सूची पुनरीक्षण से संबंधित कार्यों को पूरा करने में विफल रहे। कार्य में उदासीनता, फील्ड में अनुपस्थित रहने और प्रगति न लाने को आयोग के निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन माना गया।





