Friday, April 4, 2025
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पीसीसी के बाहर सीएम का पुतला फूंकने की कोशिश:सौरभ शर्मा की जमानत का विरोध

राजधानी भोपाल में 52 किलो सोना और 11 करोड़ से अधिक की बरामदगी के बाद सौरभ शर्मा की गिरफ्तारी हुई थी, लेकिन प्रशासन और शासन की लापरवाही के चलते उसे जमानत मिल गई है। मामले में कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा और उग्र प्रदर्शन कर सीएम का पुतला दहन किया है।

कांग्रेस के कार्यवाहक जिला अध्यक्ष अभिषेक शर्मा ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री के पास विभाग होने के बावजूद भी प्रशासन की लापरवाही इतनी अधिक है कि सही न्याय होना असंभव है। आरोप है कि पुलिस विभाग के द्वारा आरोप पत्र दाखिल नहीं होने के चलते सौरभ शर्मा को जमानत मिली है, जिसे सरकार की लापरवाही और भ्रष्टाचार में लिप्त होना साबित हो रहा है।

एसपी चन्द्र शेखर पाण्डेय ने कहा,

कांग्रेस द्वारा प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री का पुतला दहन करने का प्रयास किया गया, लेकिन प्रशासन द्वारा उनके इस प्रयास को विफल कर दिया गया है।

इधर, कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री मुकेश नायक ने पीसीसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा- लोकायुक्त जैसी संस्था आज पहरेदार नहीं बल्कि भ्रष्टाचार में भागीदार हो गई है। लोकायुक्त को भंग कर देना चाहिए।

कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने कहा,

पिछले दो महीनों से सौरभ शर्मा मध्य प्रदेश की सुर्खियों में है। आज समाचारों में खबर आई कि सौरभ की जमानत हो गई। साथ में यह भी लिखा था लोकायुक्त ने 60 दिन तक चालान पेश नहीं किया जो जमानत का आधार बन गया।

सौरभ शर्मा की जमानत लोकायुक्त, मध्य प्रदेश की पुलिस और मध्य प्रदेश सरकार के साथ जितनी भी जांच एजेंसियां हैं उनके लिए काला धब्बा है। इतिहास में उनकी बेईमानी और निर्लज्जता को याद किया जाएगा। लोकायुक्त ने 60 दिन तक चालान पेश नहीं किया और यह सिद्ध कर दिया कि लोकायुक्त पहरेदार नहीं बल्कि हिस्सेदार है।

मुकेश नायक ने कहा कि 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपया पकड़ा गया था। 11 करोड़ रुपया और 52 किलो सोना सड़कों पर पड़ा मिल रहा है। 22 साल से मध्य प्रदेश में काम कर रही यह सरकार इतनी भी सक्षम नहीं है कि वो यह बता सके कि यह सोना किसका है? मध्य प्रदेश में लोकायुक्त की कार्य प्रणाली की जितनी भी आलोचना की जाए कम है। मध्य प्रदेश में आर्थिक अपराधों के 576 ऐसे मामले हैं जिनमें लोकायुक्त ने जांच की और उन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया। बाद में पता चला कि, संबंधित विभाग ने जिनकी जांच चल रही थी उन पर केस चलाने की अनुमति ही सरकार ने नहीं दी।

मुकेश नायक ने कहा कि, सौरभ शर्मा की जमानत ने पूरे सिस्टम को हिला कर रख दिया। एक तरफ विपक्षी पार्टियों के नेता यहां तक कि मुख्यमंत्री की जमानतों के लाले पड़ जाते हैं। दिल्ली के एक मंत्री की 2 साल तक जमानत नहीं हुई। उपमुख्यमंत्री की 6 महीने तक जमानत नहीं हुई। और सौरभ शर्मा एक सिपाही की 60 दिन में जमानत हो जाती है। जो रंगे हाथों पकड़ा गया था। मध्य प्रदेश के इतिहास में आज तक ऐसी सरकार नहीं बनी। जैसी वर्तमान में चल रही है जो इतनी निर्भीकता, निर्लज्जता से खुलेआम भ्रष्टाचार कर रही है।

मुकेश नायक ने कहा कि मैं मध्य प्रदेश की सरकार से यह पूछना चाहता हूं 60 दिन तक चालान पेश न करने का क्या कारण है? किन कठिनाइयों के कारण आपने चालान पेश नहीं किया? और ऐसी क्या मजबूरी थी कि 60 दिन तक आपने चालान पेश नहीं किया और इतने बड़े आर्थिक अपराधी की जमानत हो गई ? भ्रष्टाचार के मामले में मध्य प्रदेश में 576 मामलों में अभियोजन की अनुमति न देकर सरकार भ्रष्टाचारियों को क्यों बचना चाहती है।

मुकेश नायक ने कहा कि बार-बार लोकायुक्त की नाकामी के बाद हम ऐसी संस्था जो पहरेदार न होकर हिस्सेदारी हो गई है। उसे हम क्यों ढ़ोना चाहते हैं? मैं पक्ष और विपक्ष, प्रदेश सरकार, मध्य प्रदेश के राज्यपाल से अपील करना चाहते हैं कि ऐसी संस्था का क्या औचित्य है जो पहरेदार नहीं, हिस्सेदार है। ऐसी संस्था को भंग कर देना चाहिए। ऐसी संस्था भ्रष्टाचार को रोकने के बजाय उसको प्रमोट कर रही है। और उसमें शामिल हो रही है। मैं मांग करता हूं सौरभ शर्मा के मामले में मध्य प्रदेश के हाईकोर्ट की देखरेख में उसकी जांच होना चाहिए। और एक टाइम बाउंड जांच के परिणाम आना चाहिए।

जयदीप प्रसाद का स्थानांतरण और समय पर चालान पेश न करने के कारण कौन-कौन अधिकारियों की लापरवाही है कौन इसमें दोषी हैं उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। मैं मांग कर रहा हूं कि लोकायुक्त संस्था को तत्काल भंग करके उसकी जगह कोई ऐसी स्वतंत्र इकाई का निर्माण होना चाहिए जो स्वावलंबी हो, आत्मनिर्भर हो, ईमानदारी से आर्थिक अपराधों की रोकथाम करे और दोषी व्यक्तियों को सजा दिलाए।

कांग्रेस के सीनियर लीडर विवेक सोशल मीडिया में लिखा कि

एमपी कांग्रेस ने की लोक आयुक्त संस्था भंग करने की मांग। सौरब शर्मा को ( 60 दिन में चालान ना फ़ाइल करने के कारण ) बेल हो जाना , पब्लिक ट्रस्ट के साथ बड़ा धोका है। यदि ( स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट – लोक आयुक्त) को इतना सहानुभूति थी , तो अरेस्ट की भी क्या ज़रूरत थी। #सौरबशर्मा

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