राजधानी भोपाल के रविंद्र भवन के ऑडिटोरियम में नगर निगम के वार्ड आरक्षण की कार्रवाई की गई। कुल 85 वार्डों का नए सिरे से रिजर्वेशन हुआ। इनमें से आधे वार्ड यानी 42 महिलाओं के लिए रिजर्व हुए। ओबीसी के लिए कुल 23 वार्ड रिजर्व हुए। जिनमें 12 पर सिर्फ महिलाएं चुनाव लड़ेंगी। अनारक्षित 48 वार्ड में से 23 महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। एससी-एसटी कैटेगिरी के लिए भी वार्डों का आरक्षण किया गया। करीब दो घंटे तक आरक्षण की कार्रवाई चली। इस दौरान कई बार भाजपा-कांग्रेस नेता आमने-सामने आ गए। रिजर्वेशन के साथ ही तस्वीर साफ हो गई है। इस दौरान नेताओं के चेहरों पर खुशी और मायूसी दोनों ही देखने को मिली।निगम के वार्डों के आरक्षण की कार्रवाई दोपहर 3 बजे से शुरू हुई। इससे पहले ही ऑडिटोरियम हाउसफुल हो गया। एक भी सीट खाली नहीं थी। BJP- कांग्रेस के नेता भी आरक्षण की कार्रवाई देखने पहुंचे। वहीं, हर वार्ड से लोग आए। ताकि, वार्ड की तस्वीर के बारे में पता चल सके। कलेक्टर अविनाश लवानिया की मौजूदगी में वार्डों का आरक्षण शुरू हुआ। आरक्षण से पहले कांग्रेस ने आरक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जेपी धनोपिया ने कलेक्टर से प्रक्रिया के बारे में पूछा। इससे आरक्षण प्रक्रिया कुछ देर तक रूकी रही। पूर्व पार्षद अमित शर्मा ने भी एससी-एसटी को छोड़ बाकी सभी वार्डों को आरक्षण की कार्रवाई में शामिल करने की मांग उठाई।… और कांग्रेसी बोले- आ जाओं मैदान मेंओबीसी के लिए वार्डों का आरक्षण होने के बाद कई नेताओं के समीकरण बिगड़ गए तो कई खुश नजर आए। वार्ड 31 भी ओबीसी के लिए रिजर्व हो गया। इसी वार्ड के पूर्व पार्षद अमित शर्मा की आरक्षण पर नजर थी, लेकिन यह ओसीबी कैटेगिरी के लिए चला गया। ऐसे में अब शर्मा इस वार्ड से दोबारा चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। इधर, वार्ड 46 के पार्षद रहे गुड्डू चौहान का वार्ड आरक्षण में नहीं आया। ऐसे में उनके चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ पड़ी और वे ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाने लगे। बोले कि आ जाओं अब मैदान में। मैं तैयार हूं। पास में बैठे कांग्रेस नेता मोनू सक्सेना भी अपने वार्ड 27 को कैटेगिरी में शामिल नहीं होने से खुश नजर आए।




