खंडवा। भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए गुरुवार को विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) ने एक रिश्वतखोर पटवारी को सलाखों के पीछे भेज दिया है। कोर्ट ने पंधाना क्षेत्र के ग्राम बोरगांव खुर्द निवासी पटवारी चिंताराम पटेल (50) को जमीन नामांतरण के बदले रिश्वत लेने का दोषी पाते हुए 3 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही, दोषी पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
क्या था पूरा मामला?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, ग्राम जामलीकलां के निवासी राकेश सिंह मौर्य अपनी पैतृक जमीन का बंटवारा और नामांतरण अपने भाइयों के नाम करवाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने पंधाना लोकसेवा केंद्र में आवेदन दिया था। इसी काम को जल्दी कराने के बदले हल्का नंबर 50 के पटवारी चिंताराम पटेल ने 10 हजार रुपये की मांग की थी।
“साहब अच्छे आए हैं, फटाफट काम हो जाएगा”
हैरानी की बात यह है कि पटवारी खुद शिकायतकर्ता के घर पहुंच गया था। उसने लालच देते हुए कहा था— “साहब अच्छे आए हैं, पैसे दे दो, फटाफट काम कर देंगे।” जब किसान ने कहा कि इस काम का कोई सरकारी शुल्क नहीं लगता, तो पटवारी ने दो टूक जवाब दिया कि बिना पैसे दिए काम नहीं होगा।
लोकायुक्त की जाल में ऐसे फंसा ‘रिश्वतखोर’
- शिकायत: परेशान किसान ने इंदौर लोकायुक्त पुलिस से मदद मांगी।
- ट्रैप: योजना के मुताबिक, लोकायुक्त टीम ने जाल बिछाया।
- गिरफ्तारी: पटवारी को 5 हजार रुपये की पहली किस्त लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया।
- फैसला: कोर्ट ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर पटवारी को भ्रष्टाचार का दोषी माना और सजा मुकर्रर की।
पत्रकार की कलम से : यह फैसला उन सरकारी मुलाजिमों के लिए एक बड़ा सबक है जो जनता की मजबूरी का फायदा उठाकर अपनी जेबें भरते हैं। कानून की लाठी भले ही देर से चली, लेकिन दुरुस्त चली।




