इंदौर | शिक्षा और चिकित्सा जगत के एक युग का आज अंत हो गया। इंदौर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) के पूर्व चेयरमैन डॉ. भरत छापरवाल का रविवार को निधन हो गया। वे पिछले काफी समय से अस्वस्थ थे।
डॉ. छापरवाल को न केवल एक कुशल प्रशासक, बल्कि एक दूरदर्शी शिक्षाविद के रूप में जाना जाता था। उनके कार्यकाल में इंदौर विश्वविद्यालय ने अनुशासन और अकादमिक गुणवत्ता के नए मानक स्थापित किए थे।
डॉ. छापरवाल का योगदान: एक नज़र में
- अनुशासन की मिसाल: अपने कार्यकाल में उन्होंने प्रशासनिक पारदर्शिता और अकादमिक सुधारों को प्राथमिकता दी।
- शिक्षा को समाज से जोड़ा: उनका मानना था कि विश्वविद्यालयीन शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित न रहकर समाज के कल्याण का माध्यम बने।
- शोध और नवाचार: उन्होंने रिसर्च और मूल्यपरक शिक्षा (Value-based education) को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए।
”डॉ. छापरवाल एक सरल और सुलझे हुए व्यक्तित्व के धनी थे। उनका जाना शिक्षा जगत के लिए एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई मुमकिन नहीं।” — शिक्षाविदों का साझा शोक संदेश
डॉ. छापरवाल के निधन की खबर से उनके हजारों पूर्व छात्रों, सामाजिक संगठनों और शिक्षा जगत में शोक की लहर है। उनकी सेवाओं को इंदौर और प्रदेश हमेशा याद रखेगा।



