राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के बाद गुरुवार 10 मार्च को मतगणना शुरू हो गई। जैसे ही मतगणना का काम शुरू हुआ लोग अपने-अपने घरों में टेलीविजन सेट से चिपक गए। रुझान जैसे-जैसे पुख्ता संकेतों में तब्दील हुए वैसे-वैसे कहीं खुशी तो कहीं निराशा का माहौल निर्मित होने लगा।
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर सहित सारे देश की जनता को 10 मार्च का ब्रेसब्री से इंतजार था. क्योंकि यह इन पांचों राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के लिए निर्णय का दिन रहा। चूंकि इन चुनावों के बाद आने वाले दो वर्षों के दौरान आधा दर्जन से ज्यादा राज्यों में विधानसभा और केंद्र के लिए लोकसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में ये चुनाव परिणाम एनडीए-यूपीए और अन्य सभी के लिए संभावनाओं के लिटमस-टेस्ट जैसे रहे। लिहाज़ा जिन राज्यों का इन चुनावों से बहुत लेना-देना नहीं रहा- वहां भी इनके प्रति जबर्दस्त उत्सुकता रही।
मतगणना के शुरुआती चरण में पोस्टल बैलेट के आंकड़े आए, इसके साथ ही खुशी और निराशा का दौर शुरू हो गया। मतगणना शुरू होने के के दो घंटे बाद जब स्थिति थोड़ा साफ हुई तो चाय-पान के नुक्कड़ों पर लोग राजनीतिक चुस्की का मजा लेने जमा होने लगे। किसी को उत्तरप्रदेश के परिणाम की खुशी रही तो कोई पंजाब और गोवा में अपनी पसंदीदा पार्टी के प्रदर्शन से आत्ममुग्ध रहा। इसी तरह से किसी को अपनी मनपसंद की पार्टी के सत्ता से बाहर होने की निराशा रही तो कोई तमाम घेराबंदियों के बावजूद यूपी में सत्ता की चाबी बाबा के पास ही रहने से निराश दिखा।
अगर भाजपा की बात की जाए तो उसके समर्थक यूपी शुरुआती रुझान में मिल रही सफलता से खुश रहे। कोई भी उत्तराखंड और गोवा पर चर्चा नहीं करना चाह रहा था। जबकि कांग्रेस समर्थक पंजाब को भूल उत्तराखंड के नतीजों से आस लगाए बैठे हैं। आम आदमी पार्टी समर्थक हैं तो कम लेकिन पंजाब में उनकी पार्टी के प्रदर्शन ने उनको उत्साहित कर रखा है।




