सिंगरौली जिले में मयार नदी पर बने पुल के अंतिम भुगतान (फाइनल बिल) में लाखों की हेराफेरी का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) रीवा ने मंगलवार को इस मामले में तत्कालीन SDO सुशील कुमार मिश्रा, उपयंत्री चंद्रशेखर तिवारी और ठेकेदार मेसर्स विजय कुमार मिश्रा कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड (रीवा) के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR दर्ज कर ली है।
जांच में सामने आया है कि पुल निर्माण की माप पुस्तिका में फेरबदल कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। स्वीकृत अंतिम बिल 7.37 लाख रुपए था, जिसे कथित तौर पर बढ़ाकर 40.91 लाख रुपए का संशोधित बिल बना दिया गया। इस दौरान निर्माण कार्य की माप दर्ज करने वाली माप पुस्तिका क्रमांक 605 कार्यालय से गायब मिली, जबकि 606 और 734 में जमकर काट-छांट की गई है।
तय समय सीमा पर काम पूरा न होने और करीब 4 महीने की देरी के चलते ठेकेदार पर 16.78 लाख रुपए की पेनल्टी लगाई गई थी। आरोप है कि इसी भारी-भरकम जुर्माने की राशि से बचने और अनुचित लाभ लेने के लिए दस्तावेजों में यह हेराफेरी की गई। पुल की स्वीकृत लागत 5.74 करोड़ रुपए थी, जिसका काम फरवरी 2016 में शुरू हुआ था। जनवरी 2019 में तत्कालीन SDO द्वारा अंतिम देयक प्रस्तुत किए जाने के बाद अब EOW ने इस गंभीर वित्तीय अनियमितता पर शिकंजा कसते हुए आगे की जांच शुरू कर दी है।



