Thursday, April 23, 2026
31.4 C
Bhopal

पूर्व IAS मनोज श्रीवास्तव बोले- ब्राह्मण जाति नहीं वर्ण हैं

ब्राह्मणों को लेकर की जाने वाली टिप्पणियों और उन्हें जातिवादी विचारधारा में लपेटने के मामलों पर पूर्व अपर मुख्य सचिव मनोज श्रीवास्तव ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि ब्राह्मणों को जबरन जातिवाद के दायरे में लाया जाता है, जबकि ब्राह्मण कोई जाति नहीं बल्कि एक वर्ण है।

रिटायर्ड आईएएस और पूर्व राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज श्रीवास्तव ने अपने फेसबुक वॉल पर लिखा कि यदि ब्राह्मणों को जाति की अवधारणा पसंद होती, तो स्वयं ब्राह्मणों के भीतर भी वैसी ही उपजातियां होतीं जैसी आरक्षित वर्गों में देखने को मिलती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्राह्मण जाति से नहीं, गोत्र से चला है।

जाति और गोत्र में फर्क बताया

श्रीवास्तव ने लिखा कि जाति और गोत्र में बुनियादी अंतर है। जाति एक सामाजिक व्यवस्था है, जबकि गोत्र पैतृक व्यवस्था है। भारद्वाज, कश्यप, अत्रि, विश्वामित्र, वशिष्ठ, गौतम और जमदग्नि जैसे गोत्र हैं। गोत्र व्यवस्था सगोत्र विवाह का निषेध करती थी, जबकि जाति व्यवस्था अपनी ही जाति में विवाह को बढ़ावा देती है।

‘भौगोलिक आधार पर श्रेणियां, जाति नहीं’

मनोज श्रीवास्तव ने लिखा कि ब्राह्मणों के अलग-अलग भौगोलिक समूह अवश्य हैं, लेकिन वे जातियां नहीं हैं। कोंकणस्थ, देशस्थ, कान्यकुब्ज, सरयूपारीण, गौड़, कश्मीरी, सारस्वत, मैथिल, उत्कल और द्रविड़, ये सभी एक ही वर्ण के स्थानिक समूह हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इन समूहों के बीच वह दीवार नहीं है, जो दो अलग-अलग जातियों के बीच होती है। जैसे एक ही देश के अलग-अलग क्षेत्रों के लोग होते हैं, वैसे ही ये भौगोलिक पहचान हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इनमें ऊंच-नीच या पदानुक्रम (Hierarchy) नहीं है, जैसा कि जाति व्यवस्था में होता है।

यदि कोई फर्क रहा भी, तो वह ज्ञान के आधार पर था, जैसे द्विवेदी, त्रिवेदी और चतुर्वेदी, यानी जितने वेदों का अध्ययन किया गया।

‘ब्राह्मणों’ की बात करना कुछ लोगों की मजबूरी

श्रीवास्तव ने लिखा कि यह समझना जरूरी है कि कुछ लोगों को बार-बार ‘ब्राह्मणों’ की बात क्यों करनी पड़ती है। इसका कारण यही है कि ब्राह्मण एक जाति नहीं, बल्कि वर्ण है। उन्होंने लिखा कि ब्राह्मण इस बात का उदाहरण हैं- प्रैक्टिस बिफोर यू प्रीच।

उन्होंने कहा कि आरक्षित और अनुसूचित वर्गों को भी वैसी ही जातिमुक्तता स्थापित करनी चाहिए, जैसी ब्राह्मण वर्ण ने कर दिखाई। खुद जाति के मोह में फंसे रहना और दूसरों पर दोषारोपण करना पाखंड है। पहले स्वयं खंड-खंड में बंटे रहना बंद करें, फिर आगे बढ़ें।

उन्होंने अंत में लिखा- कम ऑन, फ्रेंड्स लेट्’स डू इट। चैरिटी बिगिन्स एट होम।

नियाज खान कर चुके हैं ब्राह्मणों के लिए आरक्षण की मांग

इससे पहले पूर्व आईएएस और उपन्यासकार नियाज खान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा था कि ब्राह्मण हजारों सालों से सनातन धर्म के संरक्षक रहे हैं, इसलिए उनका सर्वांगीण विकास आवश्यक है।

उन्होंने ब्राह्मणों को आबादी के अनुसार आरक्षण देने और सभी योजनाओं में भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की थी। उन्होंने लिखा था ब्राह्मण मजबूत होगा तो देश, धर्म और आध्यात्म मजबूत होगा।

Hot this week

वृद्धा पर हमला कर लूटने वाला बदमाश 48 घंटे में गिरफ्तार, राजगढ़ का निकला आरोपी

​भोपाल। राजधानी के निशातपुरा इलाके में बुजुर्ग महिला पर...

भोपाल के 40 इलाकों में कल 6 घंटे तक गुल रहेगी बिजली

​भोपाल। शहर के लगभग 40 प्रमुख इलाकों में गुरुवार...

इंदौर: वीडियो कॉल नहीं उठाने पर युवती ने दी जान, आखिरी मैसेज में लिखा- ‘अब तुम खुश रहना’

इंदौर। परदेशीपुरा थाना क्षेत्र के जनता क्वार्टर में बुधवार...

निर्दयी माता-पिता: ढाई साल की मासूम को 400 KM दूर सड़क पर छोड़ा, भोपाल से गिरफ्तार

​भोपाल/श्योपुर: राजधानी भोपाल के एक दंपति की संवेदनहीनता ने...

Topics

वृद्धा पर हमला कर लूटने वाला बदमाश 48 घंटे में गिरफ्तार, राजगढ़ का निकला आरोपी

​भोपाल। राजधानी के निशातपुरा इलाके में बुजुर्ग महिला पर...

भोपाल के 40 इलाकों में कल 6 घंटे तक गुल रहेगी बिजली

​भोपाल। शहर के लगभग 40 प्रमुख इलाकों में गुरुवार...

निर्दयी माता-पिता: ढाई साल की मासूम को 400 KM दूर सड़क पर छोड़ा, भोपाल से गिरफ्तार

​भोपाल/श्योपुर: राजधानी भोपाल के एक दंपति की संवेदनहीनता ने...

बैंक मैनेजर युवती से क्रेडिट कार्ड बंद कराने के नाम पर 2.47 लाख की ठगी

​इंदौर। शहर में साइबर ठगों के हौसले इतने बुलंद...
spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img