भोपाल। राजधानी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल हमीदिया में एक बार फिर लापरवाही के आरोपों को लेकर आधी रात तक हाई-वोल्टेज ड्रामा चला। 6 माह की गर्भवती महिला की इमरजेंसी डिलीवरी के बाद डॉक्टरों ने नवजात को मृत घोषित कर दिया, लेकिन कुछ देर बाद बच्चे में हलचल दिखने पर परिजन भड़क गए। पुलिस की मौजूदगी में देर रात तक अस्पताल में तनाव की स्थिति बनी रही।
क्या है पूरा मामला?
शुक्रवार शाम करीब 4 बजे मानताशा नामक महिला को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था। डॉक्टरों ने तुरंत डिलीवरी कराई और परिजनों को बताया कि बच्चा मृत पैदा हुआ है। विवाद तब शुरू हुआ जब परिजनों ने शव में धड़कन और हलचल होने का दावा किया। देखते ही देखते ब्लॉक-2 में भीड़ जमा हो गई और परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। मौके पर पहुंची कोहेफिजा पुलिस ने स्थिति संभाली।

डॉक्टरों की दलील: यह ‘Abortus’ केस है
अस्पताल प्रशासन और गायनिक विभाग की सीनियर डॉक्टरों का कहना है कि यह एक ‘अत्यंत प्री-मेच्योर एबॉर्टस’ (Abortus) मामला था।
- बायोलॉजिकल रिएक्शन: डॉक्टरों के अनुसार, 6 माह से कम के भ्रूण के अंग (खासकर फेफड़े) विकसित नहीं होते। ऐसे मामलों में जन्म के बाद शरीर में कुछ समय के लिए जैविक हलचल (Biological Reaction) दिख सकती है, जिसे आम लोग जीवित होना समझ लेते हैं।
- मां की जान को खतरा: अस्पताल का कहना है कि अगर तुरंत डिलीवरी नहीं की जाती, तो संक्रमण की वजह से मां की जान जा सकती थी।
सवालों के घेरे में हमीदिया की कार्यप्रणाली
हैरानी की बात यह है कि ठीक तीन दिन पहले (बुधवार) भी ऐसा ही मामला सामने आया था, जहां मृत घोषित बच्ची की सांसें चलने का वीडियो वायरल हुआ था। बार-बार हो रही इन घटनाओं ने अस्पताल की कम्युनिकेशन गैप और जांच प्रक्रिया पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, शुक्रवार के मामले में परिजनों ने बच्चे का पोस्टमॉर्टम कराने से इनकार कर दिया और शव लेकर घर चले गए।




