चर्चित हनी ट्रेप केस में फंसे तत्कालीन टीआई अजय वर्मा को डिमोट कर दो साल के लिए इंस्पेक्टर और एएसआई धीरज शर्मा को पांच साल के लिए सिपाही बना दिया गया।
इसे लेकर टीआई वर्मा पुराने मामलों को लेकर भी चर्चाओं में है। इंदौर में दो साल पहले वे लोकायुक्त की जांच के घेरे में थे जबकि उज्जैन के महाकाल मंदिर के पास दीवार गिरने से दो लोगों की मौत के मामले में भी उन्हें सस्पेंड किया जा चुका है।
इस मामले में उन्होंने शासन की कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अपील की और मामला पेंडिंग है। इस बीच उन्होंने अपने पर लगे सारे आरोपों को झुठलाते हुए दावा किया कि चार माह से सस्पेंड होने के बाद तंगी से गुजर रहे हैं। उनका कहना है कि मेरे पांच खातों में सिर्फ 60 हजार रु. है।
इस मामले में उन्होंने शासन की कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अपील की और मामला पेंडिंग है। इस बीच उन्होंने अपने पर लगे सारे आरोपों को झुठलाते हुए दावा किया कि चार माह से सस्पेंड होने के बाद तंगी से गुजर रहे हैं। उनका कहना है कि मेरे पांच खातों में सिर्फ 60 हजार रु. है।
दरअसल दो साल पहले जब वे एमआईजी थाने में टीआई थे तब एमआईजी थाने के थानेदार और कुछ पुलिसकर्मी एक युवक को हिरासत में लेकर थाने आए थे। तब इन लोगों ने उस व्यक्ति को छोड़ने के एवज में तगड़ी राशि मांगी थी।
इस पर महिला ने लोकायुक्त पुलिस को शिकायत की तो लोकायुक्त पुलिस ने एमआईजी थाने पर छापा मारा था। तब लोकायुक्त ने एसआई राम शाक्य, श्याम जाट और नरेंद्र डांगी के खिलाफ कार्रवाई की। इन्हें सस्पेंड भी किया गया था। तीनों ने आयशर वाहन की खरीदी में अमानत में खयानत के मामले में कमल नामक व्यक्ति को थाने पर लाए थे। फिर उसे छेड़ने के एवज में उसकी पत्नी से 2 लाख रुपए की मांग की। फिर बात 50 हजार रु. में तय हुई। तब इन पुलिसकर्मियों ने महिला से पहली किश्त के रूप में रुपए ले लिए।
फिर दूसरी किश्त की बात तय हुई। इस बीच महिला ने लोकायुक्त पुलिस को शिकायत की थी। कार्रवाई के दौरान श्याम जाट भाग गया था। इसके बाद लोकायुक्त पुलिस ने पास के भवन में लगे सीसीटीवी फुटेज, महिला से बातचीत, काल डिटेल्स आदि की जानकारी जुटाई। इसके बाद टीआई अजय वर्मा की भूमिका पर सवाल उठे थे। तब तत्कालीन लोकायुक्त एसपी सव्यसाची सराफ ने टीआई वर्मा को नोटिस जारी किया था। तत्कालीन एसपी संपत उपाध्याय ने टीआई अजय वर्मा को नोटिस जारी किया था क्योंकि इससे पुलिस विभाग की छवि धूमिल हुई थी।
खास बात यह कि पुलिस विभाग का 2015 का नियम है कि अगर विभाग के किसी अधिकारी, टीआई के खिलाफ किसी एजेंसी की जांच चल रही है तो उसे फील्ड की पोस्टिंग नहीं दी जाती। इस पर इंदौर से उन्हें हटाया गया तो कुछ दिनों बाद ही उनकी पोस्टिंग उज्जैन हो गई। वहां यह बात छिपाई गई कि इंदौर में उनके खिलाफ लोकायुक्त जांच चल रही है।
दरअसल अगर कोई पुलिसकर्मी के रिश्वत का मामला होता है उसके लिए टीआई जवाबदेह होता है। इस मामले में तब वर्मा खुद थाने में मौजूद थे। लोकायुक्त पुलिस को काफी बाद में पता चला कि वहां पास में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं तो फिर डीवीआर जब्त किया था।
इसके बाद मामला आगे नहीं बढ़ा। प्रवीण सिंह बघेल (तत्कालीन जांच अधिकारी व डीएसपी) का कहना है कि इस केस में टीआई अजय वर्मा की कोई भूमिका नहीं पाई गई थी।
इसे लेकर टीआई वर्मा का भी कहना है कि मामले थाने का नहीं बल्कि पास बाहर का था। इसमें मेरी कोई भूमिका नहीं थी। जिन तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी उनके वाइस ही मैच नहीं हुए उन्हें क्लीनचिट मिल चुकी है और मुझे भी। जहां तक मुझे हाल ही में डिमोट करने का जो मामला है, उसे लेकर कानूनी राय ले रहे है।
उधर, उज्जैन में महाकाल मंदिर के पास दीवार गिरने के मामले में उस दौरान उज्जैन के तत्कालीन आईजी संतोष सिंह थे। वहां उज्जैन में महाकाल मंदिर के पास की दीवार गिरी थी। मामले में वहां वर्मा की अनुशासनहीनता मानी गई थी और सस्पेंड कर दिया गया। इस पर वर्मा ने शासन को चुनौती दी और मामला हाई कोर्ट में पेंडिंग है।




