रायसेन। रायसेन के ऐतिहासिक किले में अवैध हथियार बनाने और आवासीय बस्ती के ऊपर तोप चलाकर दहशत फैलाने के मामले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने बेहद गंभीरता से लिया है। आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने इस मामले में पुरातत्व विभाग (ASI) और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं।
प्रशासन की लापरवाही पर उठाए सवाल
आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर घटना का वीडियो साझा करते हुए प्रशासन को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि एक तरफ प्रशासन किले में स्थित महादेव मंदिर में हिंदुओं को दर्शन करने से रोकने के लिए पूरी मुस्तैदी दिखाता है, वहीं दूसरी तरफ कुछ असामाजिक तत्व ‘ईरान और रमजान’ के नाम पर अवैध तोपें चलाकर नागरिकों के जीवन को खतरे में डाल रहे हैं।
मुख्य बिंदु:
- अवैध गतिविधियां: किले के भीतर अवैध हथियार बनाने और सफील (दीवार) से गोला-बारी करने के वीडियो सामने आए हैं।
- दहशत का माहौल: आवासीय बस्ती के ऊपर तोप चलाकर जनजीवन को खतरे में डाला जा रहा है।
- जवाबदेही तय: कानूनगो ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों को अब अपने ‘कर्तव्य पालन न करने’ का हिसाब देना होगा।
- निर्देश: पुलिस को FIR दर्ज करते समय आरोपियों के पुराने इंस्टाग्राम वीडियो को भी संज्ञान में लेने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रियंक कानूनगो ने दो टूक शब्दों में कहा कि नौकरी और नियम दोनों सरकार के हैं, इसलिए इनका पालन सुनिश्चित करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। आयोग इस मामले में संबंधित अफसरों को औपचारिक नोटिस जारी कर रहा है।



