Saturday, October 10, 2026
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खाकी पर दाग: निशातपुरा पुलिस की कार्रवाई पर सवाल, घायल छात्र का 9 घंटे बाद भी नहीं हुआ मेडिकल, क्या पुलिस ने दबाव में की एकतरफा कार्रवाई ?

राजधानी के निशातपुरा थाना क्षेत्र में स्कूली छात्रों के बीच हुए झगड़े ने अब तूल पकड़ लिया है। मामले में पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि थाने में पदस्थ एक हेड कांस्टेबल ने रसूख या अन्य कारणों के चलते मामले को पूरी तरह एक पक्षीय बना दिया है।

क्या है पूरा मामला
सूत्रों के मुताबिक, स्कूल में पढ़ने वाले दो गुटों के बीच विवाद हुआ था, जिसमें दोनों पक्षों को चोटें आई हैं। घटना के बाद छात्र रेहान अपने परिजनों और एक नाबालिग दोस्त के साथ शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंचा था। लेकिन आरोप है कि वहां मौजूद हेड कांस्टेबल काशिफ अली ने शिकायत सुनने के बजाय उल्टा रेहान और उसके नाबालिग दोस्त को ही आरोपी बना दिया। इस एकतरफा कार्रवाई में यह साबित कर दिया कि आम इंसान थाने जाने से क्यों कतराता है । इस मामले में पुलिस को काउंटर केस करना चाहिए था या फिर दूसरे पक्ष के ऊपर भी धाराएं लगाकर कार्रवाई करना चाहिए थी। लेकिन निशातपुरा पुलिस ने रेहान का मेडिकल नहीं कराया है। लगता है 9 घंटे बीत जाने के बाद शरीर की सूजन कम होने का इंतजार निशातपुरा पुलिस कर रही है । अब देखना होगा पुलिस का पल्ला किस तरफ ज्यादा झुकता है या निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की जाती है।

नियमों की अनदेखी के आरोप
हैरानी की बात यह है कि घटना को 9 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी घायल छात्र रेहान का मेडिकल चेकअप नहीं कराया गया है। कानूनन मारपीट के मामले में मेडिकल रिपोर्ट अनिवार्य होती है, लेकिन यहां प्रक्रिया को ताक पर रखकर एकतरफा कार्रवाई की जा रही है।

लेन-देन की चर्चाएं गर्म
स्थानीय सूत्रों और परिजनों का आरोप है कि इस मामले को दबाने और मोड़ने के पीछे लेन-देन का खेल हो सकता है। पीड़ित परिवार का कहना है कि पुलिस दूसरे पक्ष को फायदा पहुँचाने के लिए उन पर दबाव बना रही है।

परिजनों की मांग
छात्र के परिजनों ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय पर मेडिकल नहीं हुआ, तो चोटों के निशान कम हो सकते हैं, जिससे केस कमजोर हो जाएगा। अब देखना यह है कि क्या पुलिस प्रशासन इस मामले में पारदर्शिता बरतता है या हेड कांस्टेबल की मनमानी जारी रहती है।

हम इंसाफ के लिए थाने गए थे, लेकिन पुलिस ने हमारी चोटें देखने के बजाय हमें ही अपराधी घोषित कर दिया। रेहान का मेडिकल तक नहीं कराया गया।
–छात्र रेहान के परिजन

अब देखना यह होगा कि क्या वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इस मामले में हस्तक्षेप करेंगे या निशातपुरा पुलिस की यह एकतरफा जांच इसी तरह जारी रहेगी।

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