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पत्रकार को अस्पताल के बाहर तड़पता छोड़ भागा रईसजादा, पत्रकार शहाब मलिक के लिए न्याय की जंग

भोपाल। लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया के एक प्रहरी के साथ जो हुआ, उसने पूरी राजधानी को झकझोर कर रख दिया है। पत्रकारिता जगत से एक ऐसी खौफनाक और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जिसने न सिर्फ सड़क सुरक्षा के दावों की पोल खोल दी है, बल्कि इंसानी संवेदनाओं को भी तार-तार कर दिया है।

शाम का वो खौफनाक मंजर…
तारीख 25 मई 2026, वक्त शाम के करीब 5:30 बजे । रोज की तरह ‘मलिक न्यूज़’ के संपादक शहाब मलिक अपने कार्यालय से काम समेटकर शाहपुरा की ओर बढ़ रहे थे। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही पलों में उनके साथ क्या होने वाला है। तभी अचानक, रफ्तार के कहर ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। एक तेज रफ्तार अनियंत्रित कार हवा से बात करती हुई आई और सीधे शहाब मलिक को जोरदार टक्कर मार दी।
टक्कर इतनी जबरदस्ती थी कि शहाब मलिक सड़क पर दूर जा गिरे। उन्हें गंभीर अंदरूनी और बाहरी चोटें आईं, और वे खून से लथपथ हो गए।

तड़पती हालत में अस्पताल के बाहर फेंका
इस हादसे का सबसे काला और रोंगटे खड़े कर देने वाला पहलू इसके बाद शुरू हुआ। सूत्रों के मुताबिक दुर्घटना के बाद कार चालक ने इंसानियत को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया। आरोप है कि पकड़े जाने के डर या अपनी रसूख के नशे में चूर उस कार चालक ने घायल पत्रकार को इलाज दिलाने के बहाने कार में तो बैठाया, लेकिन किसी जिम्मेदारी को निभाने के बजाय, उन्हें तड़पती और मरणासन्न हालत में अस्पताल के बाहर लावारिस छोड़ कर रफूचक्कर हो गया।

यह सिर्फ एक एक्सीडेंट नहीं, बल्कि एक रोंगटे खड़े कर देने वाला ‘हिट एंड रन’ का मामला है, जहां एक घायल शख्स को तड़पने के लिए सड़कों पर मरने छोड़ दिया गया। फिलहाल शहाब मलिक अस्पताल के बिस्तर पर असहनीय शारीरिक पीड़ा से जूझ रहे हैं और जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से न्याय की गुहार
अस्पताल के बिस्तर से ही शहाब मलिक ने प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, सूबे के आला पुलिस प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से न्याय की सिसकती हुई गुहार लगाई है। पीड़ित पत्रकार ने मांग की है कि उस बेखौफ कार चालक की तुरंत पहचान की जाए सीसीटीवी फुटेज खंगालकर दोषी को सलाखों के पीछे भेजा जाए। इस अमानवीय कृत्य के लिए उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई हो।

आक्रोश में पत्रकार जगत: क्या सुरक्षित हैं हम?
इस सनसनीखेज हादसे के बाद से पूरे भोपाल और प्रदेश के पत्रकार संगठनों में भारी आक्रोश है। समाज के जिम्मेदार नागरिकों और मीडिया कर्मियों का साफ कहना है कि किसी भी दुर्घटना के बाद घायल को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना हर नागरिक का नैतिक और कानूनी दायित्व है, लेकिन यहाँ कानून की धज्जियां उड़ाई गईं।

बड़ा सवाल यह है कि अगर जनता की आवाज उठाने वाला एक वरिष्ठ पत्रकार ही सड़क पर सुरक्षित नहीं है और न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है, तो आम जनता का क्या होगा?

पत्रकार संगठनों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषी को जल्द से जल्द गिरफ्तार नहीं किया गया, तो यह समाज में एक बेहद खतरनाक और गलत संदेश जाएगा। अब देखना यह है कि डॉ. मोहन यादव की सरकार और भोपाल पुलिस इस रसूखदार ‘हिट एंड रन’ के आरोपी को कब तक सलाखों के पीछे पहुंचाती है।

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