भोपाल के सबसे व्यस्त और संवेदनशील इलाकों में शामिल चौक बाजार में ज्वेलर्स की दुकान से हुई दिनदहाड़े चोरी का मामला अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। चोरी को 10 दिन बीत चुके हैं, सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस के पास है, आरोपी महिला की पहचान भी हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।
पीड़ित दुकानदार का आरोप है कि कोतवाली पुलिस चोर पकड़ने के बजाय मामले को दबाने और समझौते की कोशिश में जुटी है। दुकानदार का यह भी कहना है कि थाने के चक्कर काटते-काटते 10 दिन निकल गए, लेकिन हर बार जांच का हवाला देकर उसे लौटा दिया गया। इस पूरे मामले ने राजधानी में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अपराध के आंकड़े कम दिखाने के लिए एफआईआर दर्ज करने से बचा जा रहा है।
दिनदहाड़े ज्वेलरी चोरी, महिला ने दिखाई हाथ की सफाई
यह मामला 24 दिसंबर का है, जब चौक बाजार स्थित ज्वेलर्स की दुकान पर एक महिला ग्राहक बनकर पहुंची। दुकान संचालक कासिम के मुताबिक महिला ने चांदी की पायल देखने के बहाने बातचीत शुरू की। इसके बाद उसने गले की चेन, नाक की लॉन्ग और मोती की अंगूठी भी दिखाने को कहा।
महिला जिस-जिस ज्वेलरी को देखने की बात करती, दुकानदार और कर्मचारी उसे काउंटर पर रखते जाते। उस वक्त दुकान में दो अन्य ग्राहक भी मौजूद थे। इसी भीड़ और ध्यान भटकाने के बीच महिला ने एक-एक कर कई जेवरात अपने दुपट्टे के पीछे छुपा लिए और बिना खरीदी किए दुकान से निकल गई।


एफआईआर के लिए थाने पहुंचे, हर बार मिला नया बहाना
कासिम का आरोप है कि चोरी का पता चलते ही वह उसी दिन सीसीटीवी फुटेज और लिखित आवेदन लेकर कोतवाली थाने पहुंचे। वहां उन्हें यह कहकर लौटा दिया गया कि रात हो गई है, सुबह आकर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। अगले दिन जब वे दोबारा थाने पहुंचे तो पुलिस ने कहा कि महिला को बुलाया गया है, आमने-सामने बात कर लीजिए।
दुकानदार इस पर भी सहमत हो गया। लेकिन जब वह थाने पहुंचा तो महिला ऐसे बैठी थी जैसे वह फरियादी हो। उल्टा महिला ने दुकानदार पर पुराने लोन को लेकर बेबुनियाद आरोप लगाने शुरू कर दिए, जिनका कोई दस्तावेज या सबूत मौजूद नहीं था।
महिला की पहचान, फिर भी कार्रवाई शून्य
दुकानदार कासिम के अनुसार, आरोपी महिला की पहचान सीमा सेन के रूप में हुई है, जो करोंद क्षेत्र की रहने वाली है। जिस दिन चोरी हुई, वह महिला दुकान पर दूसरी बार आई थी। दुकानदार का कहना है कि पुलिस के पास महिला का नाम, पता और सीसीटीवी फुटेज होने के बावजूद 10 दिन बीत जाने के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। इससे साफ है कि पुलिस या तो मामले को हल्के में ले रही है या फिर किसी दबाव में कार्रवाई से बच रही है।
फरियादी का आरोप- चोर को संरक्षण, पीड़ित को प्रताड़ना
पीड़ित दुकानदार का आरोप है कि राजधानी में पुलिस की नजरों में चोरों से ज्यादा फरियादी ही गुनहगार बनते जा रहे हैं। पुलिस चोर पकड़ने की बजाय चोरी के मामलों को दबाने में जुटी है। कोतवाली पुलिस पर चोरी के आंकड़े कम दिखाने के लिए एफआईआर दर्ज न करने का भी आरोप लगाया गया है। दुकानदार का कहना है कि पुलिस महिला चोर और फरियादी के बीच जबरन समझौता कराने की कोशिश कर रही है, जो कानून के खिलाफ है।
कोतवाली थाना पुलिस का पक्ष
इस पूरे मामले में कोतवाली थाना पुलिस का कहना है कि शिकायत पर जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सभी तथ्यों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। हालांकि, पुलिस की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि जब सीसीटीवी फुटेज और आरोपी की पहचान सामने है, तो एफआईआर दर्ज करने में देरी क्यों हो रही है।




