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इंदौर में कोरोना काल में बढ़े ग्लूकोमा के रोगी, स्टेराइड बड़ी वजह

एक शोध में यह बात सामने आई है कि ग्लूकोमा (काला मोतिया) जहां भारत में पहले 55 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को होता था, वह अब 35 वर्ष के युवाओं में भी नजर आ रहा है। 40 की उम्र पार कर चुके हर चार में से एक व्यक्ति को ग्लूकोमा का खतरा रहता है। शहर में कोरोना काल के दौरान ग्लूकोमा के करीब चार प्रतिशत मरीज बढ़े हैं। इसके कारणों में वंशानुगत समस्या तो है ही, बिगड़ी जीवनशैली और स्टेराइड का अधिक सेवन या लंबे समय तक आंखों में स्टेराइड युक्त दवा डालना है। वक्त पर इसकी जांच न कराई जाए तो दृष्टिहीनता भी हो सकती है। लोगों को ग्लूकोमा के प्रति जागरूक करने के लिए 6 से 12 मार्च तक विश्व ग्लूकोमा सप्ताह मनाया जा रहा है।

जिला कार्यक्रम प्रबंधन अंधत्व निवारण समिति के डा. प्रदीप गोयल के अनुसार कोरोना काल में ग्लूकोमा के मरीजों की संख्या में तीन से चार प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। इसकी वजह संक्रमण की चपेट में आए लोगों का स्टेराइड का अधिक सेवन करना है। वर्तमान में नेत्र संंबंधित समस्या से जूझने वालों में करीब पांच प्रतिशत मरीज ग्लूकोमा के होते हैं। आज भी हमारे देश में जानकारी के अभाव के चलते इसके मामले कम नहीं हो रहे हैं।

बिना चिकित्सकीय सलाह के न डालें आइ ड्राप – नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. किशन वर्मा के अनुसार पहले जहां ग्लूकोमा के मामले 55 वर्ष की उम्र के बाद सामने आते थे, वहीं पिछले कुछ वर्षों में 35 वर्ष के आसपास के मरीज मिल रहे हैं। कोरोना संक्रमण की चपेट में आने वाले कई मरीजों को स्टेराइड दिया गया। ऐसे में जिन्हें आंखों से संबंधित समस्या पहले से है या जिनके परिवार में पहले से किसी को ग्लूकोमा हो, उन्हें इसकी आशंका बढ़ जाती है। स्टेराइड खाने से ज्यादा आइ ड्राप ज्यादा क्षति पहुंचा सकता है। इसलिए आइ ड्राप चिकित्सकीय सलाह के बगैर डालना भी नुकसानदायक है।

भारत में ग्लूकोमा के ज्यादा रोगी – एमवाय अस्पताल के नेत्र रोग विभाग की प्रोफेसर डा. श्वेता वालिया के अनुसार भारत में ग्लूकोमा के मरीजों की संख्या ज्यादा है। इसकी बड़ी वजह जानकारी का अभाव व अनियमित जीवनशैली है। 40 की उम्र के बाद हर चार में से एक को यह बीमारी होने की आशंका रहती है, इसलिए वर्ष में एक बार आंखों की जांच जरूर कराएं। भारत में अंधत्व का यह एक प्रमुख कारण है। शुरुआती दौर में इसके कोई लक्षण नजर नहीं आते हैं। आंखों की देखभाल के सामान्य तरीकों को अपनाकर इससे भी बचा जा सकता है।

इन बातों पर दें ध्यान –

  • आंख और सिर में तेज दर्द।
  • जी मचलाना और उल्टी।
  • आंखें लाल होना या देखने में समस्या।
  • रोशनी के आसपास रंगीन छल्ले दिखना।
  • जिन्हें पहले से आंखों से संबंधित समस्या हो।
  • जिनके परिवार में पहले भी किसी को ग्लूकोमा हो।
  • मधुमेह या उच्च रक्तचाप होने पर।
  • अधिक नंबर का चश्मा होने पर।
  • उम्र 40 से पार हो।
  • अस्थमा, आर्थराइटिस आदि की दवा में लंबे वक्त से स्टेराइड ले रहे हों।

आंख में जख्म या सर्जरी हुई हो।

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