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बजट 2022 : ड्रोन बदलेगा खेती का तरीका, कम करेगा कृषि की लागत

 केंद्रीय बजट में इस बार खेती में ड्रोन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कई रियायत दी जाएंगी। दरअसल कृषि में ड्रोन की मदद से आज न सिर्फ फसलों में कीटनाशक का छिड़काव किया जा रहा है, बल्कि फसलों के नुकसान और सर्वे करने का काम भी इनकी मदद से किया जा रहा है।

कृषि विज्ञानियों के मुताबिक आने वाले समय में ड्रोन से खेती में बुवाई का भी काम किया जा सकेगा। इसके लिए ड्रोन एक्सपर्ट अभिनव ठाकुर बताते हैं कि लगातार इसे अपग्रेड करने में लगे हैं। अब जब केंद्र सरकार ने खेती में ड्रोन के उपयोग को बढ़ावा देने का कदम उठाया है तो इससे ड्रोन बनाने वाले वालों और इसका उपयोग करने वालों दोनों को राहत मिलेगी।

किसानों को फायदा : जवाहरलाल नेहरु कृषि विश्वविद्यालय के वरिष्ठ विज्ञानी डा. शेखर बघेल बताते हैं कि बजट में ड्रोन को लेकर सरकार की घोषणा से भविष्य में किसानों को फायदा होगा। ड्रोन बनाने वाले सेक्टर में भी बदलाव आएगा। उन्होंने बताया कि ड्रोन की मदद से खेती करना धीरे-धीरे आसान होता जा रहा है। जहां खेत में कीटनाशक का छिड़काव करने के लिए पहले कई मजदूर लगते थे लेकिन अब ड्रोन की मदद से यह काम चंद मिनटों में हो जाता है। इतना ही नहीं बल्कि ड्रोन में लगे मल्टी स्पेक्ट्रल कैमरे से फसलों का डिजिटाइजेशन, फसलों की उपज, फसलों के नुकसान का रिकार्ड भी हर सीजन में रखा जा सकता है, जिससे सरकार को फसल का आकलन करने में काम समय लगेगा किसानों को मुआवजा देने में आसानी होगी।

जबलपुर आइटी पार्क में बन रही ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग यूनिट : इलेक्ट्रानिक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के अभिनव सिंह ठाकुर और अनुराग चांदना ने ड्रोन बनाने का काम स्टार्टअप के तौर पर शुरू किया जो अब बड़े स्तर पर पहुंच गया है। इसके लिए जबलपुर आइटी पार्क में ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग यूनिट (फ्लाइंगचक्र) स्टार्ट करने जा रहे है, जो मध्य प्रदेश का पहला प्लांट होगा, जिसमें एग्रिकल्चर ड्रोन के साथ साथ सर्वे, 3D मैपिंग, पुलिस और वन विभाग के लिए उपयोगी ड्रोन बनाए जाएंगे।

ड्रोन खेती में इस तरह करता है सहयोग :

– गूगल मेप की मदद से खेत का नक्शा चुनने के बाद यह अपने आप खेत में स्प्रे करता है।

– दवा अथवा बैटरी खत्म होने की स्थिति में ड्रोन वापस अपनी जगह पर लौट आता है।

– ड्रोन से दवा के छिड़काव से किसानों को खेतों में नहीं जाना पड़ता, जिससे फसलों को नुकसान नहीं पहुंचता और किसान भी दवाओं से होने वाले दुष्प्रभाव से बचता है।

– ड्रोन से होने वाले छिड़काव में दवा का भी कम इस्तेमाल होता है और कम समय में पूरे खेत में एक समान छिड़काव होता है।

– गन्ना, मक्का, अरहर जैसी फसलों एवं धान के खेत जहां पानी भरा होता है, ड्रोन से दवा का छिड़काव उपयोगी साबित होता है।

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