Monday, April 6, 2026
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पटाखों से 7 बच्चों की आंखें में परेशानी

इंदौर के एक अस्पताल में पटाखों की रोशनी और पोटाश से सात बच्चे पहुंचे। इनमें से पांच बच्चों की आंखें में गंभीर समस्या आ गई। वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ डॉ. ओपी अग्रवाल ने बताया कि पिछले 24 घंटे में तीन बच्चों की आंखों में पटाखों और देसी जुगाड़ (कार्बाइड गन) के चलते गंभीर चोटें आईं। इनके अलावा दो बच्चे पारंपरिक क्रैकर्स की चपेट में आए। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि यदि हम पिछले पंद्रह दिनों का आंकड़ा देखें तो केवल कार्बाइड गन से प्रभावित और भी दो बच्चे अस्पताल में आए, यह संकेत है कि यह समस्या धीरे-धीरे नहीं बल्कि तेजी से बढ़ रही है।

डॉ. अग्रवाल ने बताया कि इस तरह की चोटों में कॉर्निया फटने, आंख के टिश्यू में छर्रे घुसना, रेटिना की क्षति और आंख में संक्रमण जैसी जटिलताएं आम हैं। ऐसे मामलों में यदि त्वरित और सही समय पर इलाज न मिले तो स्थायी दृष्टि नुकसान या अंधापन का जोखिम बना रहता है। खासकर बच्चे जो पाइप के सीधे मुंह से देखने या चलाने की कोशिश करते हैं, वे सीधे नेत्र आघात के शिकार होते हैं, कई बार आंख का नुकसान पलटाया नहीं जा सकता।

त्योहारों के मौसम में बच्चों को पटाखों के पास न छोड़ें

घर पर न तो कार्बाइड जैसी सामग्री रखें और न ही बच्चों को कोई घरेलू जुगाड़ बनाने दें। यदि किसी बच्चे की आंख में चोट लगे तो तुरंत हाथ न लगाएं, आंख की जांच न करें और न ही कोई घरेलू इलाज करें, सीधे निकटतम नेत्र विशेषज्ञ/अस्पताल पर पहुंचाएं। स्कूलों, स्थानीय संस्थाओं और पुलिस को मिलकर जागरूकता अभियान चलाने की भी आवश्यकता है ताकि घरों में बने ऐसे देसी उपकरणों की रचना और प्रसार रोका जा सके।

डॉ. अग्रवाल ने आगे कहा, हमने पिछले पंद्रह दिनों में सिर्फ कार्बाइड से आई गंभीर चोटों के मामले देखे हैं और यह वाकई चिंताजनक है।

कार्बाइड गन क्या है और कैसे बनती है

गैस लाइटर, प्लास्टिक पाइप और आसानी से उपलब्ध कैल्शियम कार्बाइड के प्रयोग से बच्चे घर पर ही इस तरह के जुगाड़ बना रहे हैं। बंद प्लास्टिक पाइप में कार्बाइड के टुकड़े और कुछ बूंदें पानी मिलते ही एसिटिलीन गैस बनती है, जिसे किसी चिंगारी से भड़काने पर पाइप के अंदर फैलती गैस जोरदार धमाके के साथ फट जाती है।

इस प्रक्रिया की अनियंत्रितता और पाइप के टूटने पर निकलने वाले छोटे-छोटे प्लास्टिक के टुकड़े छर्रों की तरह शरीर में घुसकर गंभीर चोटें करते हैं, खासकर आंखों में। सोशल मीडिया पर वायरल किए जा रहे वीडियो बच्चों को इस प्रयोग के लिए प्रेरित कर रहे हैं, जो कि बेहद खतरनाक है।

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