इंदौर में फर्जी दस्तावेज तैयार कर लोन लेने वाले दो बदमाशों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों से पूछताछ में पता चला है कि उन्होंने दूसरे शहरों में भी इस तरह की वारदात को अंजाम दिया है। आरोपियों ने अब तक 60-70 लाख रुपए की धोखाधड़ी की है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर और भी जानकारी निकाल रही है।
एडिशनल डीसीपी अमरेंद्र सिंह ने बताया कि विजय नगर थाने में शिकायत के बाद मामला दर्ज किया गया है। जांच में सामने आया कि अज्ञात लोगों द्वारा फर्जी अकाउंट बनाकर लोन लिया गया था। जांच आगे बढ़ाई गई तो पता चला कि यह एक बड़ा फर्जीवाड़ा है। आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों से बैंक अकाउंट खोले, उनके जरिए लोन लिया और फिर फरार हो गए।
पुलिस ने इस मामले में रवि कुमार पाल (32), निवासी नोएडा और देवेंद्र सिंह (30), निवासी मंगोलिया टावर, अंशल टाउन, मेरठ को गिरफ्तार किया है। शुरुआती पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने नोएडा में ब्लू स्टार आदि कंपनियों के एसी ठीक करने वाले अनिल चौधरी के नाम पर फर्जी जीएसटी नंबर और गुमास्ता लाइसेंस तैयार किए। इसके आधार पर उन्होंने ब्लू स्टार कंपनी के नाम से बैंक में खाता खुलवाया।
शुरुआत में खाते में नकदी जमा कर उन्होंने अपने और दोस्तों के खातों में उस खाते से नियमित रूप से पैसा ट्रांसफर किया, ताकि यह दिखाया जा सके कि वे ब्लू स्टार कंपनी के कर्मचारी हैं। इस तरह उन्होंने फर्जी सैलरी स्लिप तैयार कर बैंकों को गुमराह किया और पर्सनल लोन व कार लोन लेकर फरार हो गए।
जांच में यह भी सामने आया कि देवेंद्र सिंह ने देव शर्मा के नाम से फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड तैयार कर कोटक बैंक में खाता खुलवाया। उस खाते में भी फर्जी सैलरी दिखाकर IDFC बैंक से 11 लाख रुपए का पर्सनल लोन ले लिया।

दूसरे के आधार से मोबाइल नंबर लिंक कर फर्जी दस्तावेज बनाए
रवि कुमार पाल ने अपने गांव के ही व्यक्ति शैलेश अहिरवार को भरोसे में लेकर उसके आधार कार्ड में मोबाइल नंबर लिंक कराने के बहाने से अपना मोबाइल नंबर लिंक करवा लिया। मोबाइल नंबर लिंक होने के बाद रवि ने ओटीपी के जरिए शैलेश के आधार कार्ड में इंदौर का पता अपडेट करा लिया।
इसके बाद शैलेश अहिरवार के आधार कार्ड का उपयोग करते हुए, अपना फोटो लगाकर शैलेश के नाम से फर्जी पैन कार्ड बनवाया और खुद शैलेश अहिरवार बन गया। आरोपी ने शैलेश के नाम से बैंक खाता खुलवाया और पहले की तरह उसमें फर्जी सैलरी दिखाकर नकली वेतन पर्ची तैयार की। फिर इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर IDFC बैंक से करीब 11 लाख रुपए का लोन ले लिया।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपीगण पहले भी अलग-अलग बैंकों से करीब 50 लाख रुपए के लोन ले चुके हैं। इसी कारण उनके हौसले बुलंद हो गए थे और उन्होंने फिर से बैंक में फर्जी दस्तावेजों के साथ लोन के लिए आवेदन किया। बैंक की स्पॉट विजिट के दौरान संदेह होने पर पुलिस को शिकायत दी गई, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई।




