राजगढ़ के नरसिंहगढ़ में बर्बरता का शिकार हुई 11 साल की मासूम (मूक-बधिर) बच्ची ने शुक्रवार रात दम तोड़ दिया। उसे हमीदिया के कमला नेहरू अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि दो सर्जरी के बाद भी डॉक्टर उसे बचा नहीं सके।
शनिवार को मर्चुरी पर मासूम की बुआ की आंखों से निकल रहे आंसू इस बेइंतहा दर्द की कहानी बयां कर रहे थे। इस बीच नरसिंहगढ़ पुलिस इस कोशिश में लगी रही कि फरियादी की किसी से बात न हो पाए। जैसे-तैसे उससे संपर्क हुआ। पहले तो वह टकटकी लगाए सभी को देखती रही, फिर पुलिस की तरफ इशारा करते हुए चुप हो गई। नाम पूछने पर पुलिस की ओर इशारा करते हुए कहा- सर बताएंगे।
पीएम के बाद कफन में लिपटा हुआ बाहर आया मासूम का शव देखकर बुआ बुरी तरह बिलख पड़ी। उसकी आंखों से गिर रहे आंसू शायद इस सिस्टम से न्याय मांग रहे थे। बिलखती हुई बुआ अपनी मासूम भतीजी का शव लेकर रवाना हो गई।
बुआ जाते-जाते बोलीं- हमाई बेटी छीन ली बुआ ने जाते समय अपनी चुप्पी तोड़ी और कहा- बच्ची जंगल में खून से लथपथ मिली थी। वह टी-शर्ट पहने थी, लेकिन नीचे कोई कपड़ा नहीं था। फिर उसे सरकारी अस्पताल लेकर आए। उस समय वह बैठी थी और दूध भी पिया था। यहां आकर क्या हुआ, हमें कुछ नहीं पता। दरिंदों ने हमाई बेटी छीन ली। पुलिस ने 2-3 लोगों को पकड़ा है।
रात 2 बजे घर से गायब हुई, फिर जंगल में मिली थी
एक फरवरी की रात 11 वर्षीय बच्ची खाना खाने के बाद चाचा और दादी के पास सोई थी। रात 2 बजे जागी दादी को वो गायब मिली। दादी ने शोर मचाया तो लोगों ने खोजबीन शुरू की। 2 फरवरी की सुबह 10 बजे दादी और बुआ जंगल गई तो नीम के पेड़ के पास बच्ची बैठी मिली थी। वे बच्ची को घर ले आईं। पड़ोसी ने डायल-1098 पर कॉल कर जानकारी दी। इसके बाद पुलिस बच्ची को अस्पताल लेकर पहुंची। यहां से भोपाल रेफर कर दिया था।




