शासकीय और निजी स्कूलों में पढ़ रहे 15 से 17 वर्ष के विद्यार्थियों के टीकाकरण में लापरवाही को लेकर कलेक्टर मनीष सिंह ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-144, महामारी एक्ट-1897 और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एक्ट-2005 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं। इसके तहत लापरवाही बरतने वाले तीन स्कूल मंगलवार को प्रशासन ने सील कर दिए।
रंगवासा के इंटरनेशनल स्कूल में सभी बच्चों का वैक्सीनेशन नहीं होने के कारण एसडीएम प्रतुल सिन्हा ने प्राचार्य कक्ष सील कर दिया। एसडीएम मुनीषसिंह सिकरवार ने हातोद में ज्ञान सरोवर एकेडमी का कार्यालय भी सील किया। जांच के दौरान पाया गया कि टीकाकरण में स्कूल प्रबंधन की ओर से शिथिलता बरती जा रही है। तय आयु वर्ग के कई बच्चों को टीका नहीं लगवाया गया। एसडीएम शाश्वत शर्मा ने कनाड़िया क्षेत्र में स्प्रिंग वैली हायर सेकंडरी स्कूल का निरीक्षण किया। स्कूल के पास न तो निर्धारित प्रारूप थे, न ही विद्यार्थियों के टीकाकरण का कोई डाटा उपलब्ध कराया गया। एसडीएम ने स्कूल सील कर प्रबंधन को कड़ी चेतावनी दी कि सभी पात्र विद्यार्थियों को टीके लगवाए जाएं।
कलेक्टर के आदेश : सभी स्कूलों के पास होना चाहिए विद्यार्थियों का टीकाकरण प्रमाण-पत्र
कलेक्टर ने शिक्षा विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ निजी सीबीएसई और एमपी बोर्ड स्कूल संचालकों, प्राचार्यों और सभी मदरसा संचालकों को निर्देशित किया है। उन्होंने कहा कि हर शासकीय और निजी स्कूल प्राचार्य 15 से 17 वर्ष आयु श्रेणी के बच्चों की सूची अपने पास तैयार रखें, जो उस स्कूल में पंजीकृत हैं। इस सूची में दर्शाए गए सभी छात्रों का कोविड टीकाकरण प्रमाण पत्र प्राचार्य अपने पास रखें, ताकि निरीक्षण के समय दिखाया जा सके। सभी शासकीय और निजी स्कूल प्राचार्यों के पास जानकारी भी होनी चाहिए कि छात्रों को प्रथम डोज किस दिनांक को लगी थी और द्वितीय डोज लगाए जाने की तारीख 28 दिन बाद किस दिनांक को रहेगी। जिन विद्यार्थियों द्वारा (15 से 17 वर्ष आयु) प्रथम डोज वैक्सीनेशन का प्रमाण पत्र जमा नहीं किया गया है, उनकी सूची भी प्राचार्य के पास होना चाहिए। प्राचार्य की जिम्मेदारी होगी कि ऐसे छात्रों को जागरूक कर टीकाकरण करवा लें।
सभी एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, जिला शिक्षा अधिकारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी, डीपीसी, बीआरसी, नगर निगम अधिकारी, जिले की आठ नगर परिषदों के सीएमओ, चार जनपद सीइओ अपने-अपने क्षेत्र में शासकीय एवं निजी स्कूल का निरीक्षण करेंगे। शासकीय स्कूल में लापरवाही पाए जाने पर वहां के प्राचार्य के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रस्तावित की जाएगी।




