भोपाल, 17मई 2025 — नेशनल टेक्नोलॉजी डे के निमित सविष्कार मध्यभारत द्वारा आयोजित प्रोजेक्ट आइडिया प्रतियोगिता में नवाचार और वैज्ञानिक सोच का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस आयोजन का उद्देश्य युवाओं के बीच वैज्ञानिक चेतना, नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को प्रोत्साहित करना रहा।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में श्री गौतम टेटवाल( राज्य मंत्री,कौशल विकास एवं रोजगार),श्री वीरेंद्र सिंह सोलंकी(राष्ट्रीय महामंत्री, अभाविप),
डॉ. आशुतोष कुमार सिंह (निदेशक, IIIT भोपाल) उपस्थित रहे।

श्री वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने छात्रों के प्रोजेक्ट्स की सराहना करते हुए कहा, “ये स्टूडेंट्स नहीं, ये साइंटिस्ट्स हैं। मॉडल भले ही छोटा हो, लेकिन सोच बहुत बड़ी है। भारत आने वाले समय में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा और इसमें युवाओं का महत्वपूर्ण योगदान होगा। आज स्टार्टअप का ऐसा माहौल है जहाँ युवा नौकरी लेने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बन रहे हैं। भारत अब आत्मनिर्भर बन रहा है और डिजिटल इकोनॉमी में युवाओं की भागीदारी सराहनीय है।”
उन्होंने आगे कहा, “ABVP सिर्फ एक संगठन नहीं, बल्कि एक आंदोलन है, जो छात्रों के हित और राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के लिए सतत कार्य कर रहा है। Savishkar जैसे प्लेटफॉर्म छात्रों की जिज्ञासा को नवाचार और फिर निर्माण की ओर ले जाते हैं।”

डॉ. आशुतोष कुमार सिंह ने नेशनल टेक्नोलॉजी डे के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, “इसी दिन भारत ने पोखरण में परमाणु परीक्षण कर वैश्विक मंच पर अपनी तकनीकी शक्ति का प्रदर्शन किया था। स्वतंत्रता के बाद अगर शिक्षा और विज्ञान पर समुचित ध्यान दिया गया होता, तो भारत आज विश्वगुरु बन चुका होता।”
श्री गौतम टेटवाल ने कहा, “छात्रों के प्रोजेक्ट्स में आज हमें ‘नए भारत’ की झलक मिली है। भारत सदियों से विज्ञान और तकनीकी में अग्रणी रहा है – चाहे वह महाभारत काल की तकनीक हो या आज का डिजिटल इंडिया। राजगुरु, भगतसिंह और सुखदेव जैसे युवा क्रांतिकारियों ने भी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर अंग्रेजों को चुनौती दी थी।”
कार्यक्रम में प्रतिभागी छात्रों ने विविध क्षेत्रों में नवाचार दर्शाते हुए मॉडल्स प्रस्तुत किए, जिनमें कृषि, हेल्थ टेक, ग्रीन एनर्जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ग्रामीण विकास शामिल रहे।
ABVP 1949 से छात्रों को राष्ट्र निर्माण में योगदान हेतु प्रेरित करती आ रही है, और यह प्रतियोगिता उसी उद्देश्य की एक और कड़ी रही।
जिसके बाद छात्रों को पुरस्कार प्रदान किए गए और उन्हें प्रमाण पत्रों से सम्मानित किया गया।




