कोरोना के मामले फिर सामने आने लगे हैं। इंदौर में 2 एक्टिव केस हैं, जबकि दिल्ली से केरल तक 314 मामले सामने आ चुके हैं। इस स्थिति में भी प्रदेश की राजधानी के सरकारी अस्पतालों में कोरोना की पहचान के लिए जरूरी आरटीपीसीआर जांच की व्यवस्था नहीं है। केवल एम्स ही ऐसा है, जिसमें जांच के लिए किट उपलब्ध हैं।
बीते एक सप्ताह में सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में कोरोना जैसे लक्षणों वाले मरीजों की संख्या 15 फीसदी तक बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कोरोना के जेएन-1 वैरिएंट है, जो तेजी से फैल रहा है। लोगों को खुद को सुरक्षित रखने के लिए कोरोना की आदतों को फिर अपनाने की जरूरत है।
निजी में 900 से 1200 रुपए में हो रही जांच
राजधानी में आरटीपीसीआर जांच के लिए जब निजी जांच केंद्र पर फोन कर पूछताछ की गई तो पहली बार में किसी ने भी जांच हो पाएगी या नहीं, यह जानकारी नहीं दी। सभी ने 10 से 15 मिनट में कॉल बैक कर अपडेट करने की बात कही। बता दें, कुल 5 लैब में कॉल किया गया लेकिन जवाब में सिर्फ तीन लैब से कॉल बैक आया। सभी ने दो दिन में रिपोर्ट आने की बात कही और जांच के लिए 900 रुपए, 1050 रुपए और 1200 रुपए चार्ज बताया है।
इन राज्यों से सामने आए मामले
- उत्तर प्रदेश- 4
- मध्यप्रदेश – 2
- कर्नाटक- 16
- केरल- 95
- तमिलनाडु- 66
- पुडुचेरी- 10
- पश्चिम बंगाल- 1
- सिक्किम- 1
कोविड-19 डेशबोर्ड 5 दिन से नहीं हुआ अपडेट
केंद्रीय मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड वेलफेयर का कोविड-19 डैश बोर्ड आखरी बार 19 मई 2025 की सुबह 8 बजे अपडेट किया गया था। तब तक के आंकड़ों के अनुसार देश में 257 कोरोना के एक्टिव मामले थे। वहीं, अब तक कुल कोरोना के मरीजों में से 98.81% यानी 4 करोड़ 45 लाख 11 हजार 240 मरीज स्वस्थ हुए। जबकि 5 लाख 33 हजार 666 लोगों की इस बीमारी के कारण मौत हुई।
प्रदेश के बड़े शहरों में यह स्थिति
- इंदौर में 2 एक्टिव केस इंदौर में कोरोना के दो पॉजिटिव मरीज के मामले सामने आए हैं। सीएमएचओ डॉ. बीएस सेत्या का कहना है कि दोनों की हालत अच्छी है। दोनों घर पर ही आइसोलेट हैं। उनके फिर से सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे जाएंगे। इनके संपर्क में आए लोगों की भी कांटेक्ट हिस्ट्री निकली जा रही है। इस साल जनवरी से लेकर अब तक कोरोना के पांच मरीज मिले हैं। इनमें से एक महिला की मौत हुई है जिसका कारण उसे किडनी और दूसरी बीमारियां थीं। इंदौर में कोरोना को लेकर पैनिक जैसी स्थिति बिल्कुल नहीं है।
ग्वालियर में ऑक्सीजन प्लांट हुए चेक ग्वालियर में कोविड को लेकर सीएमएचओ डॉ. सचिन श्रीवास्तव का कहना है कि दो दिन पहले ही सभी ऑक्सीजन प्लांट चेक किए हैं। लगातार हर सप्ताह ऑक्सीजन प्लांट चेक किए जा रहे हैं। बीच-बीच में मॉकड्रिल भी की जाती है। अभी कोई गाइड लाइन नहीं आई है, लेकिन सोमवार तक हम एक वार्ड भी कोविड पीड़ित के लिए रिजर्व करने जा रहे हैं। फिलहाल ग्वालियर में सामान्य स्थिति है।
जबलपुर में अस्पतालों को भेजा अलर्ट कोविड के देशभर में पॉजिटिव केस मिले हैं, जिसको देखते हुए जबलपुर में अलर्ट किया गया है। ज्वाइन डायरेक्टर हेल्थ डॉ. संजय मिश्रा का कहना है कि सरकारी अस्पतालों सहित निजी अस्पतालों को भी तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। जबलपुर जिला अस्पताल सहित मेडिकल और सिहोरा सिविल अस्पताल में स्थापित किए गए ऑक्सीजन प्लांट को हाल ही में चेक किया गया था, सब कुछ ठीक है। डॉ संजय मिश्रा का कहना है कि अभी तक राज्य सरकार की तरफ से किसी तरह की गाइडलाइन नहीं आई है, इसके बावजूद भी स्वास्थ्य विभाग ने कोविड से लड़ने की पूरी तैयारी कर रखी है।
भोपाल में आरटीपीसीआर जांच सिर्फ एम्स में प्रदेश की राजधानी के सरकारी अस्पतालों में मरीजों की जांच के लिए आरटीपीसीआर किट नहीं हैं। जेपी और हमीदिया अस्पताल में जब जांच कराने के लिए पूछताछ की गई तो यह बात सामने आई है। जबकि सीएमएचओ डॉ. प्रभाकर तिवारी ने कहा कि आरटीपीसीआर जांच जहां पहले होती थी वहां आज भी उपलब्ध है। जिले में कोरोना का सामना करने के लिए भोपाल के सभी अस्पताल पूरी तरह तैयार हैं। इधर, जेपी अस्पताल में कोरोना या संक्रमित रोगों की जांच के लिए बनाया गया फ्लू क्लिनिक पूरी तरह से उजड़ चुका है। अब यह एक पार्किंग के रूप में उपयोग में आ रहा है। जहां, बाइक को लोग धूप व बारिश से बचाने के लिए खड़ी कर रहे हैं।
गंध-स्वाद गायब, बुखार-सांस की तकलीफ, वायरल बनकर लौट रहा कोरोना
राजधानी के रीजनल रेस्पिरेशन डिजीज इंस्टीट्यूट और जेपी अस्पताल की ओपीडी में आने वाले 15 फीसदी मरीजों में कोरोना जैसे लक्षण नजर आ रहे हैं। रीजनल रेस्पिरेशन डिजीज इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. पराग शर्मा बताते हैं कि इन मरीजों में बुखार, गंध-स्वाद का चले जाना, बदन दर्द, खांसी और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। यह लक्षण 2020 की कोविड लहर की याद दिलाते हैं। हालांकि, बीमारी 7 से 10 दिन में ठीक भी हो रही है। कुछ मरीजों को जरूर भर्ती करने की जरूरत पड़ रही है।
क्या जेएन-1 खतरनाक है?
- यह तेजी से फैलता है, लेकिन इसके लक्षण आमतौर पर हल्के हैं।
- यह उन लोगों को भी संक्रमित कर सकता है जिन्हें वैक्सीन लगी हो या पहले कोविड हो चुका हो।
- डब्ल्यूएचओ और भारत सरकार ने इसे “वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट” की श्रेणी में रखा है, यानी इस पर नजर रखी जा रही है। लेकिन यह फिलहाल बहुत गंभीर नहीं है।
जेएन-1 के लक्षण
- बुखार या ठंड लगना
- गले में खराश
- खांसी
- सांस लेने में दिक्कत
- सिरदर्द
- मांसपेशियों में दर्द
- गंध और स्वाद की कमी (कुछ मामलों में)
- उल्टी-दस्त, पेट दर्द (कुछ मरीजों में ये लक्षण भी सामने आ रहे हैं)
यह सावधानियां जरूरी
- मास्क पहनें, विशेषकर भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में।
- हाथों की सफाई बार-बार करें।
- धूल और प्रदूषण से बचें।
- इन्हेलर या दवाएं समय पर लें (यदि पहले से अस्थमा, सीओपीडी के मरीज हैं)।
- डॉक्टर से तुरंत परामर्श लें, अगर गंध या स्वाद चला जाए, उल्टी-दस्त हो या सांस लेने में तकलीफ हो।




