भोपाल जिला शिक्षा केंद्र के जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) ओपी शर्मा को सरकार ने हटा दिया है। उन्हें लोक शिक्षण संचालनालय में पदस्थ किया गया है। हाल ही में एक कर्मचारी से रुपए लेन-देन की रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया में वायरल हुई थी। जिसके चलते वे सुर्खियों में आए थे। जिला पंचायत में हुई शिक्षा समिति की बैठक में भी यह मुद्दा उठा था। हालांकि, निंदा प्रस्ताव न आए, इसलिए डीपीसी शर्मा ने जनप्रतिनिधियों के हाथ भी जोड़े थे।
इसी मीटिंग में जिला पंचायत उपाध्यक्ष मोहन सिंह जाट ने वायरल रिकॉर्डिंग भी सुनाई थी। शिक्षा समिति के सभापति जाट, सदस्य विनय मेहर, विक्रम भालेश्वर, सदस्य प्रतिनिधि अनिल हाड़ा, विनोद राजोरिया भी ऑडियो को लेकर नाराज नजर आए थे।
सभापति जाट ने मीटिंग में डीपीसी के विरुद्ध निंदा प्रस्ताव लाने की बात कहीं थी। आगे की कार्रवाई शुरू होती, इससे पहले ही डीपीसी ने कहा कि मुझे साजिश का शिकार बनाया जा रहा है। रिकॉर्डिंग पुरानी है। अभी क्यों वायरल की, ये मुझे नहीं पता। जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। मीटिंग के चौथे दिन ही सरकार ने डीपीसी शर्मा के हटाने के आदेश जारी कर दिए।

सभापति ने रिकॉर्डिंग सुनाकर बताई थी बैठक के दौरान सभापति जाट ने रुपए लेन-देन वाली रिकॉर्डिंग सुनाकर बताई थी। इसके बाद डीपीसी शर्मा से जवाब चाहा गया था। वहीं, जिले में प्राइवेट स्कूलों की मान्यता को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।

संचालनालय में देनी होगी उपस्थिति शर्मा को हटाया जरूर गया है, लेकिन उनकी जगह किसी की पदस्थापना नहीं की गई है। वहीं, शर्मा की भी नई भूमिका तय नहीं हुई है। इसे लेकर जल्द ही आदेश आएंगे। दूसरी ओर, शर्मा को अब अगले आदेश तक लोक शिक्षण संचालनालय में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी।

सीहोर जिले के स्कूल में प्राचार्य थे शर्मा स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश अनुसार, ओपी शर्मा मूल रूप से सीहोर के शासकीय हाईस्कूल चांदबड़ जागीर के प्राचार्य थे। उन्हें पिछले साल 7 जून 2024 को राज्य शिक्षा केंद्र के अधीन जिला परियोजना समन्वयक के पद पर पदस्थ किया गया था।
राज्य शासन ने अब उनकी इस पद पर ली गई सेवाओं को वापस ले लिया है। साथ ही जल्द पदस्थापना का आदेश जारी करने को कहा है। इस आदेश की प्रतिलिपि स्कूल शिक्षा मंत्री के विशेष सहायक, राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक, भोपाल कलेक्टर सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई है। इस बदलाव के बाद अब ओपी शर्मा लोक शिक्षण संचालनालय में अपनी आगे की भूमिका का इंतजार करेंगे।




