स्कूटी चला रहे एक बुजुर्ग को अचानक मिर्गी का दौरा पड़ा और वह सीधे साइड में खड़ी एक कार से जा टकराए। कुछ देर तक लोग समझ नहीं पाए कि क्या हुआ, लेकिन संयोग से वहां मौजूद एक डॉक्टर की नजर पड़ी और उन्होंने तुरंत स्थिति को समझते हुए बुजुर्ग को अस्पताल पहुंचाया। यह पूरी घटना आसपास के लोगों ने कैमरे में रिकॉर्ड कर ली। अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
भोपाल के गैस्ट्रो सर्जन डॉ. अभिजीत देशमुख इकबाल मैदान से होते हुए चिरायु अस्पताल जा रहे थे। इसी दौरान उनकी नजर बुजुर्ग पर पड़ी। उस वक्त बुजुर्ग को दौरा पड़ना शुरू ही हुआ था। ऐसे में वे तत्काल बुजुर्ग के पास पहुंचे और उनको पकड़ा, जिससे चालू स्कूटी में गलती से एक्सीलेटर से रेस ना दे दें या बुजुर्ग सड़क पर ना गिर जाएं।

उन्होंने स्थिति का अंदाजा लगाते हुए, पहले बुजुर्ग के स्थिर होने का इंतजार किया। क्योंकि मिर्गी के दौरे को बीच में रोका नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे में आसपास खड़े लोगों को पैनिक की स्थिति नहीं बनने देनी चाहिए। जैसे ही बुजुर्ग की स्थिति काबू में आई, उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया।
नहीं ले रहे थे दवा… डॉ. देशमुख ने बताया कि अस्पताल में जांच और काउंसलिंग के दौरान पता चला कि बुजुर्ग को बीमारी की पहले से जानकारी थी। वे इसे लाइलाज बीमारी मान रहे थे। जिसके कारण दवा भी नहीं खा रहे थे। यही कारण है कि उन्हें अचानक तेज धूप निकलने पर दौरा पड़ने लगा।
उन्होंने बताया कि मिर्गी का दौरा कई कारणों से ट्रिगर हो सकता है, उसमें से एक अचानक तेज रोशनी के संपर्क में आना भी है। इन दिनों बादल छटने पर अचानक तेज धूप आ जाती है, जो मिर्गी के मरीजों में दौरा का कारण बन सकती है।
मिर्गी से ग्रसित व्यक्ति को नियमित दवा का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा पानी, आग और ड्राइविंग के वक्त अतिरिक्त सावधानी रखना चाहिए। भोपाल में ही ऐसे केस हैं, जिसमें घर में खाना बनाती महिला को दौरा पड़ा और वो गरम तेल से जल गई। वहीं, एक अन्य मामले में एक युवक को सीढ़ियां उतरे समय दौरा पड़ा और गिरने से ब्रेन में चोट आई। जिससे उन्हें पैरालिसिस हो गया।
हर एक हजार में 5 लोग पीड़ित डॉ. देशमुख ने बताया कि भारत में लगभग 1000 में 5 लोग मिर्गी से पीड़ित हैं। हर साल लगभग 10 लाख नए मामले सामने आते हैं। समय पर इलाज और जागरूकता से इस बीमारी पर काबू पाना संभव है।
मिर्गी क्या है? मिर्गी एक ब्रेन डिजीज है। इसमें हमारी नर्व सेल्स की सिग्नलिंग पावर प्रभावित होती है। ऐसा ब्रेन सेल्स डैमेज होने के कारण होता है। इसके कारण ब्रेन सेल्स असामान्य इलेक्ट्रिक सिग्नल बनाने लगती हैं, इसलिए दौरे पड़ते हैं।
किसी को मिर्गी का दौरा पड़े तो क्या करना चाहिए? मिर्गी के ज्यादातर मामलों में दौरा पड़ने पर किसी इमरजेंसी मेडिकल हेल्प की जरूरत नहीं होती है। यह भी है कि अगर किसी को दौरा शुरू हो जाए तो इसे बीच में नहीं रोका जा सकता है। इसलिए जरूरी है कि इस दौरान अगर आप किसी ऐसे शख्स के पास हैं, जिसे दौरा पड़ा है तो उससे दूर भागने की बजाय पास ही रहें।
मिर्गी के दौरे में दिख सकते हैं ये लक्षण:
- चेतना का खत्म हो जाना
- मसल्स का बेकाबू होना
- शरीर में तेज झटके लगना
- शरीर में दौरा पड़ना या कंपन होना
- एक जगह टकटकी लगाकर देखना
- अस्थायी भ्रम की स्थिति
- बात करने या समझने में कठिनाई
- अचानक तेज गर्मी या सर्दी महसूस होना
- अचानक रोंगटे खड़े होना
- डर या चिंता की मानसिक स्थिति
- दिल की धड़कन तेज होना या जोर से सांस लेना
इन कारणों से ट्रिगर हो सकती है मिर्गी:
- बहुत ज्यादा स्ट्रेस
- स्लीप एपनिया (नींद में सांस रुकना)
- नींद पूरी न होना
- हार्मोनल बदलाव
- कोई बीमारी या बुखार
- विटामिंस या मिनरल्स की कमी
- डिहाइड्रेशन
- कैफीन या शराब का सेवन
- फ्लैशिंग लाइट या तेज रोशनी
- बहुत ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी
- एलर्जी और नींद की दवाएं
BMHRC में जांच संभव… भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (BMHRC) में मिर्गी, दिमागी बुखार, दिमाग में सूजन जैसी कई बीमारियों के इलाज के लिए आवश्यक ईईजी (इलेक्ट्रोइन्सेफलोग्राम) टेस्ट मौजूद है। इस मशीन में वीडियो कैमरा भी लगा हुआ है। इससे जांच के दौरान मरीज की हर गतिविधि रिकॉर्ड होगी और डॉक्टर को मरीज की बीमारी की असली स्थिति और उसका विश्लेषण करने में मदद मिलेगी।
ईईजी टेस्ट की सहायता से मस्तिष्क की सामान्य और असामान्य स्थिति का पता चलता है। ईईजी टेस्ट का प्रयोग कई प्रकार के मस्तिष्क के विकारों जैसे ब्रेन स्ट्रोक, दिमागी बुखार, दिमाग में सूजन आदि की जांच के लिए किया जाता है। कई मानसिक बीमारियों जैसे साइकोजेनिक नॉन एपिलेप्टिव सीजर, न्यूरो डेवलपमेंट डिसऑर्डर, नार्कोलेप्सी आदि की जांच में भी इस मशीन का अहम योगदान है।




