मध्य प्रदेश में ग्रामीण सड़कों की खराब स्थिति तो लंबे समय से चिंता का विषय रही है, लेकिन अब राजधानी भोपाल के पास स्थित मंडीदीप से इंदौर रोड को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण बाईपास अपनी खस्ताहाली के कारण सुर्खियों में है। इस बाईपास की दयनीय स्थिति ने मोहन सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि सरकार पर केवल जनता से टैक्स वसूली करने और झूठी वाहवाही बटोरने का आरोप लग रहा है।
मरम्मत के नाम पर सिर्फ गड्ढे
यह बाईपास, जो कि वाणिज्यिक और यात्री यातायात के लिए एक अहम कड़ी है, अब सड़क कम और गड्ढों का जाल ज्यादा दिखाई देता है। सबसे अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि इस बाईपास के दोनों सिरों पर जमकर टोल टैक्स वसूला जा रहा है। स्थानीय नागरिकों और यात्रियों का कहना है कि जब सरकार सड़क की गुणवत्ता और मरम्मत के लिए पैसे ले रही है, तो फिर सड़क की यह हालत क्यों है? टोल देने के बावजूद, यात्रियों को टूटी हुई सड़कों पर जोखिम भरी यात्रा करनी पड़ रही है।
सरकार पर ‘टैक्स-केंद्रित’ होने का आरोप
राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए, लोगों का कहना है कि मोहन सरकार सिर्फ झूठी बातों से वहावही बटोरने में लगी है, जबकि ज़मीनी हकीकत यह है कि जनता के मूलभूत सुविधाओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यात्रियों ने सवाल उठाया है कि क्या सरकार का काम केवल जनता से टैक्स लेना और उन्हें बदले में खराब आधारभूत संरचना देना ही रह गया है?
बाईपास पर जगह-जगह गहरे गड्ढे दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं। यात्रियों की मांग है कि टोल प्लाजा को तब तक बंद किया जाए जब तक कि सड़क की पूरी तरह से मरम्मत नहीं हो जाती, या फिर सरकार तुरंत इस महत्वपूर्ण मार्ग की मरम्मत का कार्य शुरू करे।




