मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा है कि शहरी नियोजन ऐसा होना चाहिए जो आपदाओं को रोक सके, न कि नई आपदाओं को जन्म दे। जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के बीच अब यह आवश्यक हो गया है कि हम अपने विकास मॉडल को रेजिलिएंट (लचीला या लोचदार) और सस्टेनेबल (टिकाऊ या दीर्घकालिक) बनाएं।
इसका असर यह होगा कि आपदा आने के बाद हमारे विकास कार्यों को ज्यादा असर नहीं होगा और विपरीत परिस्थितियों से आसानी से उबरा जा सकेगा।
मुख्य सचिव जैन ने कहा कि आपदाओं से होने वाले जान-माल के नुकसान को न्यूनतम करने के लिए हमें प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि पूर्व-सक्रिय दृष्टिकोण अपनाना होगा। उन्होंने बताया कि राज्य शासन का उद्देश्य ऐसा आपदा रोधी (आपदा रोकने वाला) बुनियादी ढांचा विकसित करना है जो कठिन परिस्थितियों में भी जीवन और आजीविका की निरंतरता बनाए रखे।
अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान, मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग, यूएनडीपी इंडिया और आपदा प्रबंधन संस्थान, भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में ‘स्ट्रेंथेनिंग डिजास्टर रेजिलिएन्स’ विषय पर बुधवार को राज्य स्तरीय राउंडटेबल संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य सचिव जैन ने कहा कि ‘मिशन लाइफ’ केवल एक अभियान नहीं, बल्कि जीवनशैली में स्थायी परिवर्तन का प्रयास है। नागरिकों से लेकर संस्थानों तक सभी को पर्यावरण-संवेदनशील व्यवहार अपनाना होगा।
शहरी विकास ऐसा हो जो आपदा रोके न कि आपदा को बढ़ावा दे
मुख्य सचिव जैन ने कहा कि शहरी नियोजन ऐसा होना चाहिए जो आपदाओं को रोक सके, न कि नई आपदाओं को जन्म दे। उन्होंने सभी विभागों और स्थानीय निकायों से आग्रह किया कि वे जलवायु और आपदा जोखिमों को अपने नीति-निर्माण और परियोजना योजना का अभिन्न हिस्सा बनाएं। यूएनडीपी इंडिया की प्रतिनिधि इसाबेल चान ने कहा कि 15वें वित्त आयोग ने आपदा प्रबंधन के लिए राज्यों को वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए हैं, जिससे स्थानीय संस्थाओं को भी सशक्त बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में नवोन्मेषी वित्तपोषण, संस्थागत क्षमता-विकास और समुदाय आधारित दृष्टिकोण अपनाना समय की मांग है।
होमगार्ड की भूमिका लगातार बदल रही




