राजधानी के आर.सी.व्ही.पी. नरोन्हा प्रशासन एकेडमी में 30 और 31 जनवरी को दो दिवसीय ‘वार्षिक वानिकी सम्मेलन एवं आई.एफ.एस. मीट 2026’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राज्य मंत्री श्री दिलीप अहिरवार द्वारा किया गया। इस अवसर पर वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और भारतीय वन सेवा (IFS) के प्रदेश भर से आए अधिकारी मौजूद रहे।
वन और जल संरक्षण पर मुख्यमंत्री का जोर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारतीय वन सेवा के अधिकारियों के समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश के विशाल वन क्षेत्र और पर्यावरण की सुरक्षा में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने विशेष रूप से वन्यजीव संरक्षण के लिए जल संरचनाओं के विकास और उनके संरक्षण पर बल दिया।
सम्मेलन के दौरान राज्य में पिछले दो वर्षों में हुए विकास कार्यों की भी चर्चा की गई, जिनमें शामिल हैं:
- नए टाइगर रिजर्व और अभ्यारण्य: डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर (रातापानी), माधव (शिवपुरी) और रानी दुर्गावती (नौरादेही) जैसे टाइगर रिजर्व विकसित किए गए हैं।
- नए संरक्षण क्षेत्र: डॉ. भीमराव अम्बेडकर अभ्यारण्य (सागर), जहांनगढ़ अभ्यारण्य (श्योपुर) और ताप्ती कंजर्वेशन रिजर्व (बैतूल) की स्थापना हुई है।
- वन्यजीव पुनर्वास: प्रदेश में जंगली भैंसा, एक सींग वाला भेड़ा और किंग कोबरा को बसाने के लिए उपयुक्त रहवास तैयार किए जा रहे हैं।
सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों का संगम
इस मीट का उद्देश्य अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय और संवाद को बढ़ाना है। कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण कुछ इस प्रकार रहे: - सम्मान: वन संरक्षण में दीर्घकालीन योगदान के लिए सेवानिवृत्त अधिकारी डॉ. पी.बी. गंगोपाध्याय को सम्मानित किया गया।
- सांस्कृतिक कार्यक्रम: भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (IIFM) में अधिकारियों और उनके परिजनों के लिए चित्रकला, प्रश्नोत्तरी और सांस्कृतिक संध्या का आयोजन हुआ।
- खेलकूद: दूसरे दिन मेनिट (MANIT) स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में क्रिकेट, वॉलीबॉल, पतंगबाजी और रसाकसी जैसे खेलों के जरिए टीम भावना को बढ़ावा दिया गया।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को पुरस्कार वितरित किए गए। आई.एफ.एस. एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री एच.एस. मोहन्ता ने सभी का आभार व्यक्त किया।











