भोपाल/इंदौर/ग्वालियर/जबलपुर: मध्यप्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज करने वाले निजी अस्पतालों पर बड़ी गाज गिरी है। प्रदेश के चार प्रमुख शहरों में नियमों की अनदेखी करने वाले 126 अस्पतालों की संबद्धता (मान्यता) तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है। अब इन अस्पतालों में मरीजों को योजना के तहत नि:शुल्क इलाज की सुविधा नहीं मिलेगी।
समय सीमा में नहीं दिया NABH सर्टिफिकेट
यह कार्रवाई नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स (NABH) सर्टिफिकेट की जानकारी न देने पर की गई है। आयुष्मान कार्यालय ने इन अस्पतालों को पहले भी कई बार नोटिस जारी किए थे, लेकिन जवाब न मिलने पर रविवार को यह कड़ा फैसला लिया गया।


प्रभावित अस्पतालों का शहरवार आंकड़ा:
- भोपाल: 51 अस्पताल
- इंदौर: 30 अस्पताल
- ग्वालियर: 33 अस्पताल
- जबलपुर: 12 अस्पताल
मरीजों की सुरक्षा और गुणवत्ता प्राथमिकता: डॉ. योगेश भरसट
आयुष्मान भारत मध्यप्रदेश के CEO डॉ. योगेश भरसट ने स्पष्ट किया कि यह कदम अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता सुधारने के लिए उठाया गया है। उन्होंने कहा, “मरीजों को बेहतर और सुरक्षित इलाज मिले, इसके लिए नियमों का पालन अनिवार्य है।”
डॉ. भरसट ने बताया कि इन अस्पतालों में भर्ती पुराने मरीजों को दूसरे केंद्रों पर शिफ्ट किया जाएगा। अब ये अस्पताल नए मरीजों के ‘क्लेम’ दर्ज नहीं कर पाएंगे और जब तक सर्टिफिकेट जमा नहीं होता, इन्हें दोबारा सूची में शामिल नहीं किया जाएगा।
अच्छी सेवा पर मिलेगा 115% तक भुगतान
सरकार ने गुणवत्ता को बढ़ावा देने के लिए नई व्यवस्था भी लागू की है। जिन अस्पतालों के पास ‘फुल NABH’ सर्टिफिकेट है, उन्हें क्लेम राशि का 115% भुगतान किया जाएगा। वहीं, एंट्री लेवल सर्टिफिकेट वाले अस्पतालों को 10% अतिरिक्त राशि मिलेगी।
संपादकीय टिप्पणी: अस्पतालों का तर्क है कि NABH सर्टिफिकेट की प्रक्रिया जटिल और महंगी है, जिससे छोटे अस्पतालों को परेशानी हो रही है। हालांकि, सरकार का मानना है कि मरीजों की जान और स्वास्थ्य मानकों से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। अब मरीजों के फीडबैक से भी अस्पतालों की रेटिंग तय होगी।



