भोपाल। मध्यप्रदेश में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में हो रही लेटलतीफी अब युवाओं के सब्र का बांध तोड़ रही है। माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा में सफलता हासिल कर चुके हजारों अभ्यर्थियों ने नियुक्ति की मांग को लेकर बुधवार को लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। अभ्यर्थियों का कहना है कि चयन सूची जारी हुए 9 महीने बीत चुके हैं, लेकिन सरकार उन्हें जॉइनिंग देने में दिलचस्पी नहीं दिखा रही है।

9 महीने से सिर्फ मिल रहा आश्वासन
हैरानी की बात यह है कि करीब 10,700 अभ्यर्थियों की चयन सूची सितंबर 2025 में ही जारी कर दी गई थी। नियम पुस्तिका के अनुसार, सूची जारी होने के तीन महीने के भीतर नियुक्ति आदेश मिल जाने चाहिए थे। लेकिन आलम यह है कि मई 2026 शुरू होने के बाद भी न तो पात्र-अपात्र की लिस्ट आई है और न ही चॉइस फिलिंग शुरू हुई है। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि उन्हें मार्च और अप्रैल में जॉइनिंग का भरोसा दिया गया था, जो अब तक अधूरा है।
एक तरफ स्कूलों में शिक्षकों का अकाल, दूसरी तरफ उम्मीदवार बेरोजगार
प्रदेश के सरकारी स्कूलों की हालत चिंताजनक है। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में लगभग 99,682 शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। करीब 1,895 स्कूल तो ऐसे हैं जहाँ एक भी शिक्षक नहीं है। उम्मीदवारों का तर्क है कि जब स्कूलों में पढ़ाई ठप है और शिक्षकों की भारी कमी है, तो फिर भर्ती प्रक्रिया पर कोर्ट का स्टे न होने के बावजूद देरी क्यों की जा रही है?
उम्र और आर्थिक तंगी का बढ़ रहा बोझ
प्रदर्शन में शामिल युवाओं की दास्तां भावुक करने वाली है। इंदौर के दिनेश ठाकुर और छतरपुर के विवेक तिवारी जैसे कई अभ्यर्थियों ने बताया कि भर्ती प्रक्रिया 2022 से चल रही है। चार साल के लंबे इंतजार में कई उम्मीदवारों की उम्र 40 के पार हो चुकी है। आर्थिक तंगी का यह आलम है कि कोई कोचिंग पढ़ाकर तो कोई मजदूरी कर घर चला रहा है। कई बुजुर्ग माता-पिता अपने बच्चों की सरकारी नौकरी देखने की हसरत लिए दुनिया छोड़ गए।
चयनित युवाओं का अल्टीमेटम:
अभ्यर्थियों ने दो टूक कहा है कि नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है, ऐसे में सरकार तुरंत नियुक्ति आदेश जारी करे। यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी उग्र रूप लेगा।




