दमोह। मध्य प्रदेश के दमोह और जबलपुर से सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को हिला देने वाला एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। दमोह के सरकारी आरोग्य केंद्र और संजीवनी क्लिनिक में तैनात तीन ऐसे ‘डॉक्टरों’ को गिरफ्तार किया गया है, जिनकी एमबीबीएस (MBBS) डिग्री और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) का रजिस्ट्रेशन पूरी तरह फर्जी निकला। आरोपियों ने यह डिग्रियां 8 से 10 लाख रुपए में खरीदी थीं।
गिरफ्तार आरोपियों में कुमार सचिन यादव (ग्वालियर), राजपाल गौर (सीहोर) और अजय मौर्य (मुरैना) शामिल हैं। सचिन के पास असल में बीडीएस (BDS) और राजपाल के पास बीएचएमएस (BHMS) की डिग्री है, लेकिन ज्यादा पैसों के लालच में इन्होंने फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी नौकरी हासिल कर ली। अजय मौर्य पिछले ढाई साल से जबलपुर के संजीवनी अस्पताल में फर्जी डॉक्टर बनकर काम कर रहा था।
रोजाना देख रहे थे 30 से 40 मरीज
दमोह सीएमएचओ डॉ. राजेश अठ्या के मुताबिक, ये फर्जी डॉक्टर हर महीने 70 से 80 हजार रुपए वेतन ले रहे थे और रोजाना करीब 30 से 40 मरीजों का इलाज कर रहे थे। राहत की बात यह रही कि ये केवल ओपीडी (OPD) सेवाएं देख रहे थे और शुरुआती जांच के अनुसार किसी मरीज को कोई जानलेवा दवा देने की बात सामने नहीं आई है।
ऐसे खुला फर्जीवाड़े का राज
जब विभाग ने डिग्रियों का ऑनलाइन सत्यापन (Verification) किया, तो मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की वेबसाइट पर इनके रजिस्ट्रेशन नंबर किसी और के नाम पर दर्ज मिले। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। स्वास्थ्य विभाग ने भोपाल स्थित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) कार्यालय को पत्र लिखकर इन फर्जी डॉक्टरों की नियुक्ति तुरंत रद्द करने की सिफारिश की है।
जिले के सभी डॉक्टरों की डिग्रियों की होगी जांच
दमोह के एसपी आनंद कलादगी ने बताया कि इस रैकेट में जीवाजी यूनिवर्सिटी और रीवा मेडिकल कॉलेज का नाम भी सामने आ रहा है। फर्जी डिग्री बनाने वाले मुख्य सरगना की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें रवाना कर दी गई हैं। वहीं, इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने दमोह जिले के सभी रेगुलर, एनएचएम और बॉन्ड वाले डॉक्टरों (करीब 80 से ज्यादा) के दस्तावेजों की सघन जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।



