भोपाल: राजधानी की सड़कों पर शुक्रवार को टैक्सी ड्राइवरों का अनोखा और दर्दनाक प्रदर्शन देखने को मिला। ओला, उबर और रेपिडो जैसी ऐप आधारित टैक्सी कंपनियों की नीतियों से परेशान ड्राइवरों ने ‘बोर्ड ऑफिस चौराहे’ पर फटे-पुराने कपड़े पहनकर और हाथ में कटोरा लेकर प्रतीकात्मक ‘भीख’ मांगी।
मुख्य मांगें और दर्द:
- किराए का गणित बिगड़ा: संघ के अध्यक्ष श्रवण कुमार शर्मा के अनुसार, ड्राइवरों को महज ₹9 प्रति किमी किराया मिल रहा है, जबकि ईंधन की महंगाई के कारण गाड़ी चलाने का खर्च ₹11 प्रति किमी तक पहुँच गया है।
- दोहरी मार: ड्राइवरों का कहना है कि कमाई इतनी कम है कि या तो वे परिवार पाल सकते हैं या गाड़ी की किस्त भर सकते हैं, दोनों एक साथ संभव नहीं है।
- नियमों की अनदेखी: महामंत्री राजेश कुमार नागले ने आरोप लगाया कि कंपनियां सरकारी गाइडलाइन का पालन नहीं कर रही हैं। 2014-15 के बाद से कंपनियों की मनमानी जारी है।

उग्र आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शनकारी ड्राइवरों ने साफ कहा कि अब उन्हें कोरे आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने हस्तक्षेप कर किराया नहीं बढ़वाया और कंपनियों पर नकेल नहीं कसी, तो भोपाल में टैक्सी और ऑटो सेवा पूरी तरह ठप कर दी जाएगी।




